मुखपृष्ठ  |  कहानीकविता | कार्टून कार्यशालाकैशोर्यचित्र-लेख |  दृष्टिकोणनृत्यनिबन्धदेस-परदेसपरिवार | फीचर | बच्चों की दुनियाभक्ति-काल धर्मरसोईलेखकव्यक्तित्वव्यंग्यविविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन स्वास्थ्य |
साहित्य कोष | समाचार |

 

 Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 Click & Connect : Prepaid International Calling Cards 

 

 

जी करता जोकर बन जाऊं

जोकर मुझे बना दो जी
मोटी तोंद लगा दो जी

नाक गाल को खूब सजा कर
गोर्लगोल गेंदें चिपका कर
बन्दर जैसे दाँत दिखाकर
रोतों को भी खूब हंसाकर
हंसा-हंसा कर आंसू लाऊं
जी करता जोकर बन जाऊं

जोकर मुझे बना दो जी
मोटी तोंद लगा दो जी

तरह तरह के खेल दिखाकर
उल्टा सीधा मुंह बना कर
कानों में चप्पल लटका कर
छोटी सी एक पूंछ लगाकर
बच्चों का टट्टू बन जाऊं
जी करता जोकर बन जाऊं

जोकर मुझे बना दो जी
मोटी तोंद लगा दो जी
 

- दिविक रमेश
जून 1, 2001

Top  

           

 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल |  धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन साहित्य कोष | समाचार|
प्रतिक्रिया पढ़ें! |                         प्रतिक्रिया लिखें!

Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact

(c) HindiNest.com 1999-2007– All Rights Reserved. A Boloji.com Website
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : manisha@hindinest.com