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बुरा न मानो होली है
मुझे कुछ-कुछ याद है, मैं तीन साल की थी।यानि मेरी याद में पहली होली, हम बरेली में रहते थे। मैं स्कूल भी नहीं जाती थी। मेरी छोटी बहन मिशी तब एक साल की थी। उस दिन के एक दिन पहले रात को हमने होली जला कर पूजा की थी। मम्मी ने पूजा करके मुझे गुझिया खाने को दी थी। तब मैं नहीं जानती थी होली क्यों जलाते हैं, अब जानती हूँ, टीचर और मम्मी दोनों ने भक्त प्रहलाद की कहानी बताई है। आपको मालूम है! एक राजा हिरण्यकश्यप था, वह खुद को भगवान कहता था लेकिन उसका बेटा ईश्वर की पूजा करता था, इसलिये उससे नाराज होकर राजा हिरण्यकश्यप ने तरह-तरह से उसे मरवाने की कोशिश की। कभी वह हाथी से कुचलवाना चाहता, कभी जंगल में फिकवा देता, मगर प्रहलाद को बार बार भगवान बचा लेते। उसकी बुआ थी होलिका, उसको वरदान था कि वह आग से नहीं जलेगी। एक दिन वह प्रहलाद को लेकर आग में बैठ गई कि प्रहलाद अब जल जाएगा और वह वरदान की वजह से बच जाऐगी, किन्तु उसके बुरे विचारों की वजह से प्रहलाद तो बच गया, होलिका जल कर मर गई। और हिरण्यकश्यप को भी भगवान ने नरसिंह का रूप लेकर मार दिया। तभी से हम होलिका के रूप में बुरे विचारों को जलाते हैं। इसके पीछे एक और वजह है वह यह कि फागुन माह में फसलें पक कर तैयार होती हैं, इसकी खुशी में हम होली मनाते हैं। तब मैं ये सब नहीं जानती थी पर मुझे अच्छा लग रहा था। जब रंग खेलने की बारी आई तो सुबह मम्मी ने पुराने कपडे पहनाए तो मुझे खराब लगा। पर तब आश्चर्य हुआ जब हमेशा पानी में न खेलने देने वाली मम्मी ने एक पिचकारी दी और रंगीन पानी देकर मुझे लॉन में छोड दिया। सबसे पहले मैंने अपनी ठुमुक-ठुमुक चलती बहन को पानी डाल कर रूला दिया, और आस पास की सारी जमीन रंग दी और मम्मी ने कुछ नहीं कहा!! मम्मी टेबल पर मिठाईयाँ और नमकीन लगा रही थी, पापा गुलाल प्लेट्स में निकाल रहे थे। तभी बहुत सारे अंकल और आंटी आकर मम्मी-पापा पर रंग लगाने लगे, पहले तो मैं डरी फिर मजा आने लगा। बहुत से बच्चे भी पिचकारियाँ लेकर आए थे, हम एक दूसरे पर पानी डालने लगे। लेकिन मम्मी की गोदी में मेरी बहन मिशी डर कर रोए जा रही थी। सब होली है! होली है! कह रहे थे। तब मैंने जाना ये होली है, इस दिन सारी बदमाशियाँ माफ होती हैं।
कनुप्रिया कुलश्रेष्ठ
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