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भू–गर्भ में बहती अद्भुत नदी

बेहद आश्चर्य की बात है ना किन्तु पृथ्वी के अनेकानेक रहस्यों की तरह यह भी सत्य है। हमारी पृथ्वी के गर्भ में करीब साढ़े सात हजार किलोमीटर लम्बी विद्युत की धारा बहती है। यह करंट की नितान्त प्राकृतिक नदी है।
प्रकृति के इस विचित्र रहस्य को आस्ट्रेलिया के तीन वैज्ञानिकों ने खोज निकाला था जो कि आस्ट्रेलिया में चुम्बकीय क्षेत्रों का पता लगाने का वैज्ञानिक काम कर रहे थे। विस्तृत अध्ययन के बाद यह सत्य सामने आया कि भू–गर्भ में कोई ऐसी महाशक्ति मौजूद है जो कि करंट का तेज झटका मारती है‚ तब विशेष वैज्ञानिक तरीकों और यंत्रों से पता लगाया कि यह तो करंट की एक लम्बी धारा है‚ जो पृथ्वी के तकरीबन 25 किमी नीचे बह रही है।. आश्चर्य तो यह है कि 25 से 35 किमी मोटाई और 60 से 250 किमी चौड़ाई की आठ हजार लम्बी यह विद्युत नदी पृथ्वी के गर्भ में करोड वर्षों से शांत बह रही है।अगर इसकी तुलना पृथ्वी पर किसी प्राकृतिक पर्वत श्रृंखला या नदी से की जाए तो इसका आकार पृथ्वी की सबसे बड़ी पर्वत श्रृंखला जितना होगा।
इस विद्युत धारा के रहस्य को जानने के लिये कि आखिर भू–गर्भ में करंट का निर्माण कैसे होता है, अमेरिका‚ जापान‚ जर्मनी के वैज्ञानिक भू–गर्भ में विशिष्ट तकनीकी वाले उपकरण लगा कर शोध में जुटे हैं। जापान के वैज्ञानिकों का अंदाज़ यह है कि पृथ्वी के बदलते चुंबकीय क्षेत्र तथा उसकी सतह पर प्राकृतिक बनावटों में हुए परिवर्तन से हुई आंतरिक प्रतिक्रियाओं के परिणाम से यह विद्युत धारा बनती रही है।

– आकाश

 

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