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नेता
आया हैं चुनाव का मौसम,
लेकर कटोरा निकला नेता
मिला एक-एक वोट तो,
बन गए हुजूर नेता
लगे नेता भारी करने,
अपनी-अपनी जेब को,
चुना जिसको जनता ने,
उसने जनता को ही लूटा
बाद में खुलता हैं,
जनता की अक्ल का ताला,
मीठी छूरी से गला काटता, ऐसा हैं ये नेता
गोपाल भाटी |
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