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नेता

आया हैं चुनाव का मौसम, लेकर कटोरा निकला नेता
बड़े-बड़े ये वादे करता
, फिर इनको यह पूरा न करता

मिला एक-एक वोट तो, बन गए हुजूर नेता
देखेगें अब ये नेता
, देश को अब क्या हैं ये देता,

लगे नेता भारी करने, अपनी-अपनी जेब को,
भूखा देखता बार-बार
, अपने भूखे पेट को,

चुना जिसको जनता ने, उसने जनता को ही लूटा
मीठी-मीठी वाणी में
, सबको फसाने वाला,

बाद में खुलता हैं, जनता की अक्ल का ताला,
समझ न पाई जिसको
, ऐसी यी भोली-भाली जनता,

मीठी छूरी से गला काटता, ऐसा हैं ये नेता

 

गोपाल भाटी
मार्च 4, 2008

           
 

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