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सत्य

अंधेरा नहीं जीत पायेगा सत्य से
कई सारे रुप और भ्रमों की
बौछार लेकर आया है अंधेरा
बना है वो मवाद और रक्त से
अंधेरा नहीं जीत पायेगा सत्य से ।
परेशानियां हमेशा सच्चे लोगों को हुई हैं
फिर भी सत्य की शक्ति कभी कम नहीं हुई हैं
कुछ वक्त के लिये काले बादलों के रुप में छा जाता है अंधेरा
पर हर काली रात के बाद होता है सवेरा ।

जहर का प्याला पिलाया सुकरात को
सूली पर चढाया गया मसीहा को
लेकिन फिर भी नहीं मिटा पाये सत्य को
मरकर भी जिन्दा रहे थे जहान में
बदल गये थे एक तूफान में ।
सच्चाई की आभा को तोडने का करता है प्रयास
और अंधेरा लगाता है कयास
पर अंत मे हमेशा जीत सत्य की ही होती है ।

खण्डहरों में बदल देना चाहतें हैं
सभ्यता को दुश्मन इंसानियत के
लगाते हैं अटटहास ऐसे मानो
जैसे सत्य के योध्दा डर जाये
मानवता चीखे और सत्य हार जाये
मगर मूर्ख हैं सारे
सच्चे कभी नहीं हारे ।
अंधेरा नहीं जीत पायेगा सत्य से ।

अनिल कुमार खण्डेलवाल
मार्च 4, 2008

           
 

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