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आंधी में दीपक बुझे होंगे
आंधी में
दीपक बुझे होंगे कितने ही महमाँ जुटे घर में कुछ तो अपनों से रहे होंगे हम तो कह आए हृदय की बात बाद में किस्से बने होंगे मौलवी -पंडित जो मिल बैठे तय है ये ,झगडे खड़े होंगे बस्तिओं में मजहबी नारे लोग कुछ बहशी रहे होंगे उठ रही हैं आग की लपटें बेबसों के घर जले होंगे हम न कहते थे की तोड़ो मत कच्चे फल खट्टे लगे होंगे प्राण, वो बैसाखिओं के बल राह में कुछ तो चले होंगे
प्राण
शर्मा |
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