![]() |
मुखपृष्ठ | कहानी | कविता | कार्टून | कार्यशाला | कैशोर्य | चित्र-लेख | दृष्टिकोण | नृत्य | निबन्ध | देस-परदेस | परिवार | फीचर | बच्चों की दुनिया | भक्ति-काल धर्म | रसोई | लेखक | व्यक्तित्व | व्यंग्य | विविधा | विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन | स्वास्थ्य
साहित्य कोष | समाचार | |
|
Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | Feedback | Contact | Share this Page! |
|
|
काश ऐसा होता काश ! कभी कुछ ऐसा होता हँसता हर कोई, कोई न रोता होता बडा न कोई छोटा होता काश ! कभी कुछ एसा होता ।। कर्ज न होता दर्द न होता न गर्मी आती - न मौसम ये सर्द ही होता चिन्ता कभी न कोई होती निश्चिन्त होकर हर कोई सोता काश ! कभी कुछ एसा होता ।। तकरार न होती - बस प्यार ही होता प्यार न होता, संसार न होता प्यार बिना बेकार सब होता प्यार ही प्यार जहाँ में होता हँसता हर कोई - कोई न रोता काश ! कभी कुछ एसा होता ।।
सुशील कुमार पटियाल |
|
|
मुखपृष्ठ
|
कहानी |
कविता |
कार्टून
|
कार्यशाला |
कैशोर्य |
चित्र-लेख | दृष्टिकोण
|
नृत्य |
निबन्ध |
देस-परदेस |
परिवार
|
बच्चों की
दुनिया |
भक्ति-काल धर्म |
रसोई |
लेखक |
व्यक्तित्व |
व्यंग्य |
विविधा |
|
|
Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | Feedback | Contact |
|
(c) HindiNest.com
1999-2008 All Rights Reserved. A
Boloji.com Website |