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काश ऐसा होता

काश ! कभी कुछ ऐसा होता

हँसता हर कोई, कोई न रोता

होता बडा न कोई छोटा होता

काश ! कभी कुछ एसा होता ।।

कर्ज न होता दर्द न होता

न गर्मी आती -

न मौसम ये सर्द ही होता

चिन्ता कभी न कोई होती

निश्चिन्त होकर हर कोई सोता

काश ! कभी कुछ एसा होता ।।

तकरार न होती -

बस प्यार ही होता

प्यार न होता, संसार न होता

प्यार बिना बेकार सब होता

प्यार ही प्यार जहाँ में होता

हँसता हर कोई - कोई न रोता

काश ! कभी कुछ एसा होता ।।

 

सुशील कुमार पटियाल
सितंबर
16,2008

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