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कब होंगे आजाद हम कब होंगे आजाद हम कब होंगे आवाद हम कब मिटेंगे फासले कब होंगे सब सम ।। दिलों में दूरी बढती जाए प्रेम की सांसे ढलती जाएं पास है सब कुछ अपने फिर भी लगता है कि है ये कम कब होंगे आजाद हम ।। आजादी तो यह नाम की है दुनिया सारी दाम की है आजाद वही है, है जिस में दम कब होंगे आजाद हम ।। कहा बापू ने और कहा नेहरू ने क्या सुभाष था कह गया क्या सपने थे उनके प्यारे क्या आखिर ये रह गया भूल गए सब - न आँख किसी की होती नम कब होंगे आजाद हम कब होंगे सब सम ।।
सुशील कुमार पटियाल
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