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अनेकता में एकता

अनेकता में एकता है, हिन्दी की विशेषता
एक राह के मीत
, आह-आह-आह-आह
मीत एक प्यार के
, एक बाग के है फूल
फूल एक हार के

देखती है यह जमीन, आसमान देखता
कर्म है बटे हुए
, पर एक मूल मंत्र है
देश भक्ति ही हमारा
, एक मात्र धर्म है
कंठ
-कंठ देश का, एक स्वर बिखेरता
एक देश के है अंग
, आह-आह-आह-आह

रंग भिन्न-भिन्न है, एक जननी भारती के
काटी सूत अभिन्न है
कोटी
-कोटी बालको में, ब्रह्म एक देवता
एक लक्ष्य एक प्राण
, तन से हम जुटे हुए
एक जननी भारती की
, अर्चना मे लगे हुए
कोटी
-कोटी साधको का, एक राष्ट्र देवता

अनेकता में एकता, अनेकता में एकता ……….

सलोनी जैन
नवंबर 26, 200
7

           
 

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