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लहरों मे
लडता- भिडता- चिल्लाता
तोडता और फेंकता ,
नन्हा सा पुतला
शक्ति- स्फूर्ति- चैतन्य का ।
घूमती फिरकी सा,
इतनी तेज
कि जैसे दिखे ही ना
इतनी तेज !
घुर्र घुर्र घूमता,
भागता दौडता,
फिर अचानक मेरी गोदी में आता
ठहरता पल भर को
ममता भरे सुरक्षित पहरों में;
भाग जाता फिर
अनंत से संसार की आवाज देती लहरों में।


-गरिमा गुप्ता

कविताएं
वश में है   - रामेश्वर काम्बोज हिमांशु
तुम बोना कांटे
  - रामेश्वर काम्बोज हिमांशु
माँ की ममता - राजेसिंह उपनाम पी.डी.राजन   तृतीय पुरस्कार
तुम्हारी ममता - श्रीमती स्मिता दारशेतकर
माँ होने का अहसास -  कायनात काजी
हम और बच्चे -  विकेश निझावन
बचायें बचपन
  - रोहिनी कुमार भादानी
ममता का समंदर  - रेणु आहूजा।
ममता
- अम्लान मिश्र
लहरों में  -गरिमा गुप्ता
यादें - समीर लाल

कहानियां
उसके हिस्से का सुख - विकेश निझावन
तरंगों की तल्खियां - धनपत राय झा
ओस की नन्हीं बूंद - सरोज मिश्र  प्रथम पुरस्कार
लेख
बचपन
: सिखाएं अपने बच्चों को दोस्त बनाने की कला- के. सुधा
आप और आपके किशोर होते बच्चे : आज आपने अपने बच्चे को गले लगाया
? - के. सुधा द्वितीय पुरस्कार
 


 

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