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तुम्हारी ममता
सागर की विशालता जैसी है विशाल तुम्हारी ममता
पानी जैसी तरल सरल है तुम्हारी ममता

-१-
तुम्हारी बाहों का विस्तार
भुला देता है मेरा हर दर्द हर परेशानी
भगवान के हैं दो वरदान धरती पर
एक माँ की ममता दूसरा पानी
मुझको बुलाती है बार-बार तुम्हारी ममता
सागर की विशालता जैसी है विशाल तुम्हारी ममता

-२-
तुम्हारी मुस्कान इन होंठों की हँसी
इन्हीं में छुपी है मेरी भी खुशी
न जाऊँगा कभी छोड़कर तुमको
अपने दामन में बसा लेना मुझको
मुझे है प्यारी तुम्हारी ममता
सागर की विशालता जैसी है विशाल तुम्हारी ममता

-३-
सागर है खुश आज अपनी लहरों के साथ
आया हूँ मैं भी थामने तुम्हारा हाथ
तुम्हारे प्यार का `माँ' मोल नहीं इस जग में
तुम्हारा विश्वास ही दौड़ता बनकर खून मेरी रग में
मेरा तो सब कुछ है तुम्हारी ममता
सागर की विशालता जैसी है विशाल तुम्हारी ममता

-४-
नहीं चाहिए `स्मित' मुझको कुछ भी
केवल तुम्हारा प्यार मिले
समर्पित सारी खुशियाँ अगर
तुम्हारी ममता और दुलार मिले
है वही निर्धन इस जग में जिसे न मिले तुम्हारी ममता
सागर की विशालता जैसी है विशाल तुम्हारी ममता

 

- श्रीमती स्मिता दारशेतकर

 

कविताएं
वश में है   - रामेश्वर काम्बोज हिमांशु
तुम बोना कांटे
  - रामेश्वर काम्बोज हिमांशु
माँ की ममता - राजेसिंह उपनाम पी.डी.राजन   तृतीय पुरस्कार
तुम्हारी ममता - श्रीमती स्मिता दारशेतकर
माँ होने का अहसास -  कायनात काजी
हम और बच्चे -  विकेश निझावन
बचायें बचपन
  - रोहिनी कुमार भादानी
ममता का समंदर  - रेणु आहूजा।
ममता
- अम्लान मिश्र
लहरों में  -गरिमा गुप्ता
यादें - समीर लाल

कहानियां
उसके हिस्से का सुख - विकेश निझावन
तरंगों की तल्खियां - धनपत राय झा
ओस की नन्हीं बूंद - सरोज मिश्र  प्रथम पुरस्कार
लेख
बचपन
: सिखाएं अपने बच्चों को दोस्त बनाने की कला- के. सुधा
आप और आपके किशोर होते बच्चे : आज आपने अपने बच्चे को गले लगाया
? - के. सुधा द्वितीय पुरस्कार
 

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