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सीमाओं के आर-पार करोड़ों के
दिलों में बसते हैं भगत सिंह

भगत सिंह एक ऐसा नाम है जो चाहे भारतीय पंजाब हो या पाकिस्तानी पंजाब, हर पंजाबी के दिल में बसता है। पंजाबी ही क्यों, हर हिन्दुस्तानी के दिलों में भगत सिंह के लिए खास जगह है और पाकिस्तान में भी उनके प्रति श्रद्धा रखने वालों की कमी नहीं है। 60 साल पहले भले ही यह उप-महाद्वीप दो मुल्कों में बट गया, लेकिन आज भी यह महान शहीद सीमा के आर-पार करोड़ों लोगों के दिल में बसता है।

अगर भारत में पवित्र सिख शहर अमृतसर को भगत सिंह की जन्मसदी के लिए सजाया-संवारा जा रहा है तो पाकिस्तान में वहां की सरकार ने लियालपुर जिले के बंगा गांव में भगत सिंह के सम्मान में एक स्मारक बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसी गांव में इस महान क्रांतिकारी का जन्म हुआ था। इसे इत्तफाक कहें या दिलचस्प तथ्य कि भगत सिंह के पूर्वजों का पुश्तैनी गांव एक और बंगा शहर से महज 5 किलोमीटर दूर है। इस गांव का नाम खटकर कलां है। भगत सिंह ने अंग्रेजों को हिन्दुस्तान से खदेड़ने की लड़ाई में अपनी जान गंवाई थी। आज भले ही खटकर कलां के अधिकांश युवक गांव छोड़ चुके हैं और दुनिया भर में फैल चुके हैं, लेकिन इस गांव की आधुनिकता और समृद्धि दूसरे गांवों को अनुप्राणित करती है।

निहंग नेता और इस गांव के पूर्व मुखिया कश्मीरा सिंह ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि हमें इस पर गर्व है कि हमारे गांव का संबंध भगत सिंह से है। हाल के वर्षों में इस गांव का विशेष कायाकल्प हुआ है। खास कर वर्ष 2002 में तत्कालीन राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के इस गांव का दौरा करने के बाद गांव में काफी बदलाव आया है। भगत सिंह को ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे. पी. सॉन्डर्स की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने अप्रैल, 1929 को सेंट्रल लेजिस्लेटिव एसेंबली में बम भी फेंका था। उन्हें ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में 23 मार्च, 1931 को फांसी दे दी गयी थी। तब वे 24 वर्ष के भी नहीं थे। भगत सिंह की जन्मसदी खटकर कलां से लेकर अमृतसर और पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ के कई इलाकों में मनाई जा रही है। भगत सिंह के भतीजा जगमोहन सिंह, जो प्रोफेसर हैं, ने कहा कि भगतसिंह दरअसल, क्रांतिकारी योद्धा थे। वे क्रांतिकारी चिंतक थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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