साक्षात्कार

रियायत के विरुद्ध: प्रो. दिव्यप्रभा नागर

प्रो. दिव्यप्रभा नागर हाल ही में उदयपुर स्थित जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विष्वविद्यालय की कुलपति नियुक्त हुई है। वे उदयपुर संभाग के किसी भी विष्वविद्यालय के पहली महिला कुलपति है। साधारण अध्यापक के रूप में अपना कैरियर प्रारंभ कर षिक्षा के सर्वोच्च षिखर पर पहुंचने की उनकी यात्रा सहज नहीं रही। प्रो. नागर ने अपने सिद्धांतों और कुषल प्रषासन से अब तक गंभीर पहचान बनाई है। कुलपति बनने के बाद विष्वविद्यालय में यूजीसी के विभिन्न दलों के दौरों से विष्वविद्यालय की साख में वृद्धि हुई है। वहीं महिला होने के नाते वे महिलाओं के सम्बंध में भी ठोस कार्य के लिए पहल करने का साहस रखती है। प्रस्स्तुत है उनसे बातचीत

पल्लव: उदयपुर में तीन विष्वविद्यालय है और पुराने भी है। पहली बार इन तीनों में से किसी में महिला कुलपति केा नियुक्ति मिली हैं। आप इस अवसर को किस तरह देखती है ?
प्रो. नागर: देखिए, मुझे समाज ने बहुत बड़ा सम्मान दिया है और इसे एक गौरव के रूप में देखा है। उदयपुर मेवाड़ का पुराना शहर है जहॉ एक महिला को ऐसा पद दिया जाना सामाजिक घटना है। मेरे लिए यह बड़ा नैतिक संबल है क्योंकि इससे मेरा विष्वास बढ़ा है कि मेरे कार्य और कार्य शैली को स्वीकार किया गया। यह वाकई उर्जा देने वाला अनुभव है। जहॉ तक चुनौती की बात है वह यह कि दिन प्रतिदिन की समस्याओं का समाधान कर सुचारू व्यवस्था देनी है ताकि हम अकादमिक उन्नयन को प्राप्त कर सकंे। कार्यकर्ताओं का पूरा सहयोग मुझे मिल रहा है इसलिए मेरा विष्वास  और बढ़ता जा रहा है।

पल्लव: मुझे ज्ञात हुआ है कि राजस्थान विद्यापीठ में आपके कैरियर की शुरूआत अप्रिय हुई थी।
प्रो. नागर: मुझे एक बार इस संस्थान को छोड़कर जाना पड़ा। तब यह संस्थान समूहों में विभाजित थी और मुझे लगता था सर्वेाच्च अधिकृतियॉ समूहवाद में विष्वास करती थीं। प्रदर्षनप्रियता ठोस कार्य पर हावी थी। लेकिन अन्ततः जब मेरा चयन डबोक के लोकमान्य तिलक षिक्षक प्रषिक्षण महाविद्यालय में हुआ तब मेरे चयन का आधार साक्षात्कार में मेरा प्रदर्षन और मेरा रिकार्ड ही था।

पल्लव: यह बात भी हुई कि आप विद्यापीठ के संस्थापक मनीषी पं. जनार्दनराय नागर के परिवार से ही है ? 
प्रो. नागर: जी हॉ। परिवारवाद कहकर आलोचना का प्रसाय हुआ। लेकिन विद्यापीठ में आने से पूर्व मैंने विद्याभवन में 21 वर्ष काम किया  है। अनुभव अर्जित किए और योग्यता साबित की। ..... आज भी अगर कोई ऐसी बात करता है तो मेरा उत्तर मेरी योग्यता मेरा काम है। डबोक के महाविद्यालय का विकास खुद बोलता है।

पल्लव: आपके नेतृत्व में विष्वविद्यालय में महिला अध्ययन केन्द्र काम कर रहा है। आगे क्या योयजनाएॅ है?
प्रो. नागर: हमने प्रायोजनाएॅ बनाने, सरकार से स्वीकृतियॉ लेने के लिए एक कुषल महिला को नियुक्ति दी है। जो योजना है वह यह कि इस आदिवासी अंचल में महिलाओं को लेकर अधिकाधिक कार्य करें ताकि उनको भी बेहतरी और बराबरी का अवसर मिले। इस दिषा में हमारा जन षिक्षण केन्द्र भी विस्तार से काम कर रहा है।


पल्लव: महिला होने के कारण कोई लाभ या रियायत मिली है ?
प्रो. नागर: महिला होने के नामे मुझे कोई सुविधा नहीं चाहिए। यह कंधा बराबरी का है। राजस्थान विद्यापीठ की महिलाएॅ शालीनता के साथ हिम्मत वाली हैं। वे अपने अधिकार और कर्तव्य दोनो जानती है तथा उन्हें मर्यादा के साथ उनके इस्तेमाल का अनुभव है। मेरी अब तक की समझ रियायत के विरुद्ध  ही रही है?

 पल्लव: आखिर आप रियायत की इतनी विरोधी क्यों है ?
प्रो. नागर: देखिए, जब आप रियायत की मांग करते है तो वहीं आप पर अबला होने की मुहर स्वतः लग जाती है। मेरा मानना है कि किसी भी औरत में शक्ति, संकल्प और सहिष्णुता की कमी नहीं होती। फिर क्यों रियायत? पूरे आत्मविष्वास के साथ काम करें और फिर देखे कि क्या बाधा सामने आती है।

पल्लव: तो क्या स्त्री विमर्ष की जरूरत है समाज को ?
प्रो. नागर: बहुत है। सरकारों ने तरह तरह के नियम कानून बनाए हैं। कुछ ठोस परिणाम भी सामने आए है लेकिन बराबरी के दर्जे के लिए काम करना पडे़गा। स्त्री को स्वयं अपने लिए लड़ना होगा।

पल्लव: पितृसत्तात्मक व्यवस्था के बारे में आप क्या सोचती है ?
प्रो. नागर: पुरानी चीजें है समाज में। लेकिन अगर परिवार में सहभागिता का वातावरण निर्मित किया जाए तो बराबरी आएगी ही।

पल्लव: अच्छा ! कुलपति बनने  के बाद क्या नये अनुभव रहे ?
प्रो. नागर: मैं षिक्षा संकाय से जुड़ी हुई थी। डबोक कॉलेज में सभी लोग मेरे काम करने के तरीके से परिचित हो गए थे। लोगों ने हमारे विष्वविद्यालय मके बारे में बुरी धारणा थी कि यहॉ वर्क कल्चर नहीं है। तो मैंने इसे ही चुनौती माना। क्यों नहीं है वर्क कल्चर ? मैंने जब यहॉ खुद देखा तो ऐसा पाया नहीं। यह नकारात्मक प्रचार जैसा ही था लोग काम करते है। 
     ..... हॉ, यह हर कहीं होता है कि काम करने वाले और काम नहीं करने वाले के बीच भेद नहीं किया जाता। इससे काम करने वाले हतोत्साहित होते है। अब मैं ऐसा नहीं होने देती। लोगों को भी यह अच्छा लग रहा है। काम करने में आनंद आ रहा हैै।
 ....... आप देखिए हमारे कर्मचारी संघों ने नियमानुसार काम करने की अपील की है। यह मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है। यही तो मैं चाहती थी।

पल्लव: आपके लक्ष्य क्या है इस पद केा ग्रहण करने के बाद ?
प्रो. नागर: अनियमितता कोई नहीं हो, सभी कार्यकर्ताओं केा पूरा न्याय - अधिकार और सम्मान मिले। अनुषासन कायम रहे।

पल्लव: इससे कोई दुविधा तो नहीं होगी ?
प्रो. नागर: मुझे पद से समय पूर्व हटना पड़े तो भी मैं तैयार हॅू लेकिन गुणात्मकता के लिए समझौता नहीं करूंगी।
हर रोज मेरा नया जन्म होता है, इतने विषाल अनुभव मिलते है। नया सवेरा आएगा और हम इसके लिए सबको सक्रिय, साथ सन्नद्ध करेंगे। 

प्रस्तुति-  पल्लव
            समन्वयक
मीडिया अध्ययन केन्द्र
माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय
                               फोन नं0 09414732258

 

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