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दमा के मरीजों के लिए लंदन, 6 दिसम्बर (आईएएनएस)। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों के अनुसार डीजल से होने वाला वायु प्रदूषण दमा के मरीजों के लिए ज्यादा हानीकारक होता है। दमा सांस की एक बीमारी है जिसमें सांस लेने में दिक्कत, सीने में दबाव और खांसी की शिकायत होती है। बीबीसी आनलाईन के अनुसार दमा के मरीजों पर किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि डीजल के धुंए से उनके फेंफड़ों की काम करने की क्षमता में अधिक गिरावट दर्ज हुई। हालांकि वैज्ञानिकों को इस बात की जानकारी नहीं है कि पेट्रोल का धुंआ भी इन मरीजों को इसी तरह प्रभावित करता है या नहीं। वास्तविक परिस्थितियों में दमा के 60 मरीजों पर किए गए इस अध्ययन में यह पाया गया कि बसों और टैक्सियों के धुए के बीच दो घंटे से ज्यादा समय बिताने पर मरीजों के फेफड़ों की कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई। लंदन के 'रायल ब्राम्पटन अस्पताल' के वैज्ञानिक दल के प्रमुख डा. पाल कलिनन के अनुसार, ''डीजल के धुंए का प्रभाव उन लोगों पर और भी अधिक था जो दमा से गंभीर रूप से पीड़ित थे।'' इंडो-एशियन न्यूज सर्विस |
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