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एक्सपर्ट निंदक
सोशल
सेक्टर में
प्रोफेशनलों एवं स्पेशलिस्टों की बूम के साथ ही निंदा के
क्षेत्र
में भी एक्सपर्टाइजेशन जरूरी हो चला है. कुशल गांधीगीर निंदक,
सत्य-अहिंसा के बलबूते समाज की मेन स्ट्रीम में इंट्री मार ही लेता है.
आयडियल
निंदक तिल को ताड़ और ताड़ को तिल इजिली बना देता है. हथगोले की
फुस्स को,
हैंडग्रेनेड की धड़ाम में कनवर्ट करने का हुनर हो या
अंतरराष्ट्रीय मुठभेड़ों को कल्लू-कल्लू की चुहलबाजी में
तब्दील करना,
परफेक्ट निंदक का माइंड हजार जीबी रैम वाला एवं निगाहें
माइक्रोस्कोपिक
होती हैं. अनलिमिटेड जूम के साथ जो वस्तु को उसकी कंप्लीटनेस
एवं हर एंगल
से देखती है. इतना टेक्निकल होने के बावजूद एक्सपर्ट निंदक
का दिल निहायत
भावुक होता है. मसलन हत्या,
आत्मदाह,
डकैती की
निंदा के टाइम आंखों में
नमी,
विपक्ष की निंदा करते समय आक्रामकता,
आतंकी घटना
की निंदा करते वक्त
वादों को फुल
स्पीड में भड़काने माफिक विशेष क्रियाकलापों के महारथी होते
हैं. वैदिक
कालीन नारदीय निंदक पलायनवादी होते हैं,
जबकि मुंहफट निंदक
टिकाऊ एवं
ड्यूरेबल होता है जो निंदा के स्वरूप को व्यापक एवं दायरे को
यूनिवर्सल
बनाता है. लफ्फाज निंदक बनने के लिए स्ट्रांग प्रेजेन्स ऑफ
माइंड एवं
लेखकीय निंदक हेतु कलमतोड़ सिंसियरिटी का होना बहुत जरूरी है.
निंदकावस्था में तल्लीन महानुभाव देखते ही देखते महापुरुष प्रदर्शन एवं
नारेबाजों
की चिल्ल-पों पर एक एक्सपर्ट ट्रेंड निंदक ही भारी पड़ता है जो
बिना बवाल
काटे महा बवाल खड़ा कर देता है. प्रखर निंदक,
दकियानूस और
घिसे-पिटे
सामाजिक,
आर्थिक,
राजनैतिक
मुद्दों को निंदा का विषय नहीं बनाता
अपितु विविध न्यू सब्जेक्ट्स की सर्च एवं मॉडीफाइंग कैपेसिटी
का प्रयोग कर
आउटडेटेड सब्जेक्ट को रीजेनरेट कर भरपूर आउटपुट का लुत्फ
उठाता है. उसे
निंदा के मानकों की परवाह कहां?
सरे बाजार
निंदा,
बात न बनी तो जूता
मार
निंदा,
अगर निशाना
चूक भी गया तो विस्तार निंदा का ही होता है. मसलन,
चूके
हुए निशाने
की निंदा,
निशानेबाज की
निंदा,
असहनीय प्रहार से
बचने वाले
सहनशील की निंदा
तमाशबीनों की निंदा आदि. बहरहाल ऐसे निंदक को नाम तो
मयस्सर
होता ही है साथ ही जूतों का दाम भी. निंदा करने और करवाने के नायाब
नुस्खों का
कॉपीराइट तो कुछ निंदक पुरोधाओं के पास एकदम सेफ है. बेरोजगारी
और मंदी के
दौर में युवाओं को इन निंदक गुरुओं के शरणागत होकर शॉर्ट टर्म
ट्रेनिंग
कर लेनी चाहिए. जिससे युवा बेहतरीन निंदा का कांट्रैक्ट ले इसे
ऐज अ करियर
एडॉप्ट कर सकें. अगर आपने अभी तक निंदागीरी स्टार्ट नहीं की
है,
तो
धीरे-धीरे खुद को स्थापित करने की जद्दोजहद में मशगूल हो जाइये.
निंदक
नियरे राखिये नहीं,
बल्कि इसकी नियरता
में इजाफा कर निंदक गले
लगाइये. आखिर एक्सपर्ट निंदक आपके निंदनीय कृत्य को चार चांद
जो लगा देता
है. ऐसे निंदकाधिराजों पर देश को नाज है. तो भइया
डिग्री-विग्री हथियाने
के साथ-साथ इस विधा पर भी ध्यान दो. एक तो निंदा रस का आनंद
बहुत मधुर है
दूसरे इसके प्रोफेशनल फायदे भी बहुत हैं. जय हो निंदा देवी
की.
पंकज प्रसून
अप्रेल 22, 2008 |
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