![]() |
मुखपृष्ठ | कहानी | कविता | कार्टून | कार्यशाला | कैशोर्य | चित्र-लेख | दृष्टिकोण | नृत्य | निबन्ध | देस-परदेस | परिवार | फीचर | बच्चों की दुनिया | भक्ति-काल धर्म | रसोई | लेखक | व्यक्तित्व | व्यंग्य | विविधा | विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन | स्वास्थ्य | साहित्य कोष | |
|
Home | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | Weather | Feedback | Contact | Share this Page! |
|
|
Custom Search
|
|
|
फेसबुक पर इस माह के चर्चित
ब्लाग
मनोज पटेल
अपर्णा मनोज
कनुप्रिया
Manisha Kulshreshtha
|
वन्दना शर्मा की कविताएँ
तुम्हारे प्रेम में हूँ...ये कुछ सबूत मुझको मिले हैं गर्म तवे पर जल की बूँद सी ये औरतें .... और अब हम विरोध के लिए सन्नद्ध हैं
कहानियां
कौआ जानता है, दादी कब उठती है। वह रोज सुबह आंगन के उस पार बीऊल के पेड पर आकर बैठा रहता। दादी बाहर निकलती तो उसके हाथ में रात के बचे रोटियों के टुकडे होते।वह उन्हें हथेलियों के बीच बारीक मसलती और आंगन में एक ओर पत्थर पर रख देती। जैसे ही वह भीतर आती, कौआ उडक़र उन्हें निगल जाता। फिर काफी देर पेड पर बैठा रहता चुपचाप।
उसने अपना सूटकेस दरवाजे के आगे रख दिया। घंटी का बटन
दबाया और प्रतीक्षा करने लगा। मकान चुप था। कोई हलचल नहीं - एक क्षण के लिये
भ्रम हुआ कि घर में कोई नहीं है और वह खाली मकान के आगे खडा है। उसने रुमाल
निकाल कर पसीना पौंछा, अपना एयर बैग सूटकेस पर रख दिया। दोबारा बटन दबाया और
दरवाजे से कान सटा कर सुनने लगा, बरामदे के पीछे कोई खुली खिडक़ी हवा में
हिचकोले खा रही थी।
- आगे
पढें
|
लेख
इस्मत आपा की कहानियाँ और भारतीय मुस्लिम समाज
English Section
Poetry - Nand
Chaturvedi
Dr Ashutosh Mohan
THE BOOK
|
|
|
मुखपृष्ठ | कहानी | कविता | कार्टून | कार्यशाला | कैशोर्य | चित्र-लेख | दृष्टिकोण | नृत्य | निबन्ध | देस-परदेस | परिवार | बच्चों की दुनिया | भक्ति-काल | धर्म | रसोई | लेखक | व्यक्तित्व | व्यंग्य | विविधा | विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन | साहित्य कोष |प्रतिक्रिया पढ़ें! | प्रतिक्रिया लिखें! |
|
Home | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | Feedback | Contact |
|
(c) HindiNest.com
1999-2012 All Rights Reserved. A
Boloji.com Website |