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प्रेरक प्रसंग
1
महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के काटलुक गांव में एक प्राईमरी स्कूल था. कक्षा चल रही थी.

अध्यापक ने बच्चों से एक प्रश्न किया  यदि तुम्हें रास्ते में एक हीरा मिल जाए तो तुम उसका क्या करोगे?
मैं इसे बेच कर कार खरीदूंगा एक बालक ने कहा.
एक ने कहामैं उसे बेच कर धनवान बन जाउंगा.
किसी ने कहा कि वह उसे बेच विदेश यात्रा करेगा.
चौथे बालक का उत्तर था कि मैं उस हीरे के मालिक का पता लगा कर लौटा दूंगा.
अध्यापक चकित थे, फिर उन्होंने कहा किमानो खूब पता लगाने पर भी उसका मालिक न मिला तो?
बालक बोला,  तब मैं हीरे को बेचूंगा और इससे मिले पैसे को देश की सेवा में लगा दूंगा.
शिक्षक बालक का उत्तर सुन कर गद्गद् हो गये और बोले, शाबास तुम बडे होकर सचमुच देशभक्त बनोगे.

शिक्षक का कहा सत्य हुआ और वह बालक बडा होकर सचमुच देशभक्त बना,
उसका नाम थागोपाल कृष्ण गोखले.

2
भारत और रूस के संयुक्त प्रयासों से अम्कलेश्वर में तेल के कुंए खोदे गए. उनमें से तेल निकला तो पंडित नेहरू बडे प्रसन्न हुए. वे अम्कलेश्वर तेल के कुंए देखने पहुंचे, निरीक्षण के दौरान अचानक तेल के कुछ छींटे उनकी अचकन पर जा गिरे. सारे इंजीनियर और दूसरे अधिकारी परेशान हो गए और उन्होंने नेहरू जी से अनुरोध किया कि वे अपनी अचकन बदल लें.

नेहरू जी यह बात सुन कर बोलेवाह, यह कैसे हो सकता है. यह तो मेरे लिये गौरव की बात है. मैं तो इसी अचकन को पहन कर संसद में जाउंगा और वहा/ सभी को दिखाउंगा कि ये धब्बे अपने देश में निकाले गए तेल के हैं.

- अंतरा जोशी
सितम्बर 9, 2001

3
विवेक
यूनान के प्रसिध्द दार्शनिक सुकरात एक बार अपने शिष्यों के साथ चर्चा में मग्न थे. उसी समय एक ज्योतिष घूमता-घामता पहुंचा, जो कि चेहरा देख कर व्यक्ति के चरित्र के बारे में बताने का दावा करता था. सुकरात व उनके शिष्यों के समक्ष यही दावा करने लगा. चूंकि सुकरात जितने अच्छे दार्शनिक थे उतने सुदर्शन नहीं थे, बल्कि वे बदसूरत ही थे. पर लोग उन्हें उनके सुन्दर विचारों की वजह से अधिक चाहते थे.

ज्योतिषी सुकरात का चेहरा देखकर कहने लगाइसके नथुनों की बनावट बता रही है कि इस व्यक्ति में क्रोध की भावना प्रबल है.

यह सुन कर सुकरात के शिष्य नाराज होने लगे परन्तु सुकरात ने उन्हें रोक कर ज्योतिष को अपनी बात कहने का पूरा मौका दिया.

''इसके माथे और सिर की आकृति के कारण यह निश्चित रूप से लालची होगा. इसकी ठोडी क़ी रचना कहती है कि यह बिलकुल सनकी है, इसके होंठों और दांतों की बनावट के अनुसार यह व्यक्ति सदैव देशद्रोह करने के लिये प्रेरित रहता है.

यह सब सुन कर सुकरात ने ज्योतिषी को इनाम देकर भेज दिया, इस पर सुकरात के शिष्य भौंचक्के रह गये.सुकरात ने उनकी जिज्ञासा शांत करने के लिये कहा किसत्य को दबाना ठीक नहीं. ज्योतिषी ने जो कुछ बताया वे सब दुर्गुण मुझमें हैं, मैं उन्हें स्वीकारता हू/. पर उस ज्योतिषी से एक भूल अवश्य हुई है, वह यह कि उसने मेरे  विवेक  की शक्ति पर जरा भी गौर नहीं किया. मैं अपने विवेक  से इन सब दुर्गुणों पर अंकुश लगाये रखता हू/. यह बात ज्योतिषी बताना भूल गया.

शिष्य सुकरात की विलक्षणता से और प्रभावित हो गये.

- सुधा रानी
नवम्बर 4, 2001

4
कर्तव्य
विश्वविजित होने का स्वप्न देखने वाले सिकन्दर और उनके गुरु अरस्तू एक बार घने जंगल में कहीं जा रहे थे. रास्ते में उफनता हुआ एक बरसाती नाला पडा.

अरस्तू और सिकन्दर इस बात पर एकमत न हो सके कि पहले कौन नाला पार करे. उस पर वह रास्ता अनजान था, नाले की गहराई से दोनों नावाकिफ थे. कुछ देर विचार करने के बाद सिकन्दर इस बात पर ठान बैठे कि नाला तो पहले वह स्वयं ही पार करेंगे. कुछ देर के वाद विवाद के बाद अरस्तू ने सिकन्दर की बात मान ली. पर बाद में वे इस बात पर नाराज हो गये कि तुमने मेरी अवज्ञा की तो क्यों की. इस पर सिकन्दर ने एक ही बात कहीमेरे मान्यवर गुरु जी, मेरे कर्तव्य ने ही मुझे ऐसा करने को प्रेरित किया. क्योंकि अरस्तू रहेगा तो हजारों सिकन्दर तैयार कर लेगा. पर सिकन्दर तो एक भी अरस्तू नहीं बना सकता.

गुरु शिष्य के इस उत्तर पर मुस्कुरा कर निरुत्तर हो गये.

- सुधा रानी
नवम्बर 4, 2001

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