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बाल कविताएं

एक कहानी में सारे

 

आसमान कितना ऊँचा है !
कितने
ऊँचे हैं तारे !
पर आ जाते जाने कैसे !
एक कहानी में सारे!

'दोस्त अगर बन जाएं मेरे
आसमान के, माँ तारे?
तो मैं तेरे जन्म दिवस पर
दूँगी सब को गुब्बारे

मजा आएगा तब तो कितना
जाएंगे जब घर तारे
आसमान में तारों के संग
होंगे कितने गुब्बारे !

मगर कँहा से लाओगी माँ
इतने सारे गुब्बारे ?
बतला दूंगी, बतला दूंगी
जब आएंगे घर तारे !

- दिविक रमेश

खुशी लुटाते हैं त्यौहार

उपहारों की खुश्बू लेकर
जब-जब आ जाते त्यौहार
त्यौहारों का आना जैसे
टपटप टपटप माँ का प्यार

लेकिन सोचा तो यह जाना
सभी मनाते हैं त्यौहार
सबको ही प्यारे लगते हैं
माँ की गोदी से त्यौहार

जब लहलहाती हैं फसलें तो
खेत मनाते हैं त्यौहार
जब लद जाते फूल-फलों से
पेड मनाते हैं त्यौहार

पानी से भर जाती हैं तब
नदियों का होता त्यौहार
ठंड में मीठी धूप खिले तो
सूरज का होता त्यौहार

जिस दिन पेड नहीं कटते हैं
जंगल का होता है त्यौहार
और अगर मन अडिग रहे तो
पर्वत का होता है त्यौहार

अगर ना दुर्घटना हो कोई
सडक़ मनाती तब त्यौहार
मार काट ना चोरी हो तो
शहर मनाता है त्यौहार

दिल खोल कर खुशी लुटाते
कोई हो, सब पर त्यौहार
खिलखिल हँसते, खुशियाँ लाते
लेकिन लगते कम त्यौहार

अगर बीज इनके भी होते
खूब उगाते हम त्यौहार
खुश होकर तब उडते जैसे
पंछी उडते बाँध कतार

- दिविक रमेश
   

कविता फूलों में


तुम भी देखो, हमने देखी
कविता फूलों में

सुबह सुबह जब कलियाँ खिलती
मजेदार जब खुशबू मिलती
जब बांछे हम सब की खिलती
हवा चले तो टहनी हिलती

जिधर देखते उधर फूल
ये झूलें झूलों में

तारों में भी कविता होती
कविता लहरों में भी होती
हममें होती तुममें होती
ढूंढो तो यादों में होती

यही नहीं कविता होती
बचपन की मीठी भूलों में

बादल में रिमझीली कविता
पर्वत पर बर्फीली कविता
झरनों में झरनीली कविता
बिजली में चमकीली कविता

अगर फूलों में होती कविता
तो होती है, शूलों में कविता

- दिविक रमेश

           

 

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