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अबोध का बोध पाठ

हैं छोटे छोटे हाथ मेरे
छोटे छोटे पांव

नन्हीं नन्हीं आंखें मेरी
नन्हें नन्हें कान

फिर भी हरदम चलता हूं
हाथों से करता काम

रोज देखता सुंदर सपना
सुनता सुंदर गान

ऐ बडों हमारी सुनो प्रार्थना
तुम भी बच्चे बन जाओ

छो
डों झगडे और लडाई
अच्छे बच्चे बन जाओ

_ लावण्या शाह
जून 22,  2000

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