![]() |
मुखपृष्ठ | कहानी | कविता | कार्टून | कार्यशाला | कैशोर्य | चित्र-लेख | दृष्टिकोण | नृत्य | निबन्ध | देस-परदेस | परिवार | फीचर | बच्चों की दुनिया | भक्ति-काल धर्म | रसोई | लेखक | व्यक्तित्व | व्यंग्य | विविधा | विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन | स्वास्थ्य
|
|
Home | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | Feedback | Contact | Share this Page! |
|
|
|
ऑटो के पीछे क्या है? नयी दिल्ली, 14 दिसम्बर (आईएएनएस)। सुबह-सबेरे दिल्ली की सड़कों पर चलते वक्त यदि ऑटो रिक्शा के पीछे लिखा दिख जाय 'बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला' तो अन्यथा न लें बल्कि गौर करें। क्या ये चुटकीली पंक्तियां शहरी समाज के एक तबके को मुंह नहीं चिढा रही हैं? गौरतलब है कि ऐसी सैकड़ों पंक्तियां तमाम ऑटो रिक्शा व अन्य गाड़ियों के पीछे लिखी दिख जाएंगी जो बेबाक अंदाज में शहरी समाज की सच्चाई बयां करती हैं। अंदाजे-बयां का ये रूप केवल हिन्दुस्तान तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में प्रचलित है। इन पंक्तियों के पीछे भला क्या मनोविज्ञान छिपा हो सकता है, इस दिलचस्प विषय पर शोध कर रहे दीवान ए सराय के श्रृंखला संपादक रविकांत ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, ''ऑटो रिक्शा के पीछे लिखी चौपाईयां, दोहे और शेरो-शायरी वहां की शहरी लोक संस्कृतियों का इजहार करती हैं। मनोभावों की अभिव्यक्ति का ये ढंग पूरे दक्षिण एशिया में व्याप्त है।'' उन्होने कहा, ''पाकिस्तान में भी आपको ऑटो रिक्शा के पीछे लिखा दिखेगा 'कायदे आजम ने फरमाया तू चल मैं आया।' कहने का मतलब यह है कि हर वैसी चीजें जो शहरी समाज का हिस्सा हैं वह शब्दों के रूप में ऑटो रिक्शा व अन्य वाहनों के पीछे चस्पां हैं। वह रूहानी भी हैं और अश्लील भी। सियासती भी हैं और सामाजिक भी। फिलहाल मैं और प्रभात इन लतीफों को इकट्ठा कर रहा हूं जिसे अब तक गैरजरूरी समझ कर छोड़ दिया गया था। यकीनन इससे शहरी लोक संस्कृतियों को समझने में काफी मदद मिलेगी।'' खैर! इसमें दो राय नहीं है कि ऑटो रिक्शा व अन्य गाड़ियों को चलाने वाले चालकों का जीवन मुठभेड़ भरा होता है। इन्हें व्यक्ति, सरकार और सड़क तीनों से निबटना पड़ता है। तनाव के इन पलों में ऐसी लतीफे उन्हें गदुगुदा जाते हैं। पर क्या अब दिल्ली में इजहारे-तहरीर पर भी सियासती रोक लगा दी गई है? क्योंकि ऑटो रिक्शा चालक संजय बतालाता है, ''भाई साहब शेर-वेर के चक्कर में अब न ही पड़ें तो अच्छा है। यहां 5 हजार रुपये का जुर्माना हो जाता है।''
ब्रजेश
झा इंडो-एशियन न्यूज सर्विस |
|
|
मुखपृष्ठ | कहानी | कविता | कार्टून | कार्यशाला | कैशोर्य | चित्र-लेख | दृष्टिकोण | नृत्य | निबन्ध | देस-परदेस | परिवार | बच्चों की दुनिया | भक्ति-काल धर्म | रसोई | लेखक | व्यक्तित्व | व्यंग्य | विविधा | विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन | साहित्य कोष |प्रतिक्रिया पढ़ें! | प्रतिक्रिया लिखें! |
|
Home | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | Feedback | Contact |
|
(c) HindiNest.com
1999-2012 All Rights Reserved. A
Boloji.com Website |