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देश का एकलौता ग्रीक अध्ययन केंद्र लोकप्रिय हो रहा है नई दिल्ली, 30 दिसम्बर (आईएएनएस)। इसे भारत-यूनान ऐतिहासिक रिश्ते को अकादमिक जामा पहनाने की गंभीर पहल कहा जा सकता है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) स्थित ग्रीक अध्ययन पीठ के पाठयक्रमों में छात्रों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है और इस पीठ में उनकी संख्या बढ़कर करीब 40 हो गई है। यह देश का एकमात्र ग्रीक अध्ययन पीठ है। यूं तो दुनिया के तमाम प्रमुख विश्वविद्यालय में ग्रीक अध्ययन पीठ हैं, लेकिन भारत में महज आठ साल पहले ही इसकी स्थापना की सुगबुगाहट हुई। वर्षों तक यह अध्ययन केंद्र जैसे-तैसे चलता रहा। यहां यूनानी इतिहास, संस्कृति और भाषा की पढाई के लिए एक विदेशी शिक्षक की सेवा ली जाती रही, पर अब यह जिम्मेवारी प्रो. यू.पी अरोड़ा संभालते हैं। करीब आठ वर्षो तक अपेक्षा की मार झेलने वाले इस अध्ययन केंद्र में छात्रों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ने लगी है। अरोडा ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा,''अब जब पूरा यूरोप अपनी ऐतिहासिक विरासत को यूनान से जोड़कर देखता है, भारत में भी इस देश की संस्कृति और इतिहास को समझने का रुझान बढ़ा है।'' उन्होंने कहा कि दोनों देशों का इतिहास साझा रहा है और यह आश्चर्य की बात है कि भारत ने इस पीठ की स्थापना के लिए इतना लंबा इंतजार किया। वह कहते हैं,''इतिहास लेखन के जनक हेरोडोटस ने अपनी रचनाओं में भारत का काफी उल्लेख किया है , वही भारतीय नाटय, मूर्तिकला, चित्रकारी और यहां तक कि साहित्य पर भी यूनान की गहरी छाप रही है। होमर, इलियड, मेगस्थनीज, सेल्यूकस, सिकंदर जैसी प्राचीन ग्रीक हस्तियों ने भारत को प्रभावित किया। सभ्यता, कला, संस्कृति को कोई भी क्षेत्र यूनानी प्रभाव से अछूता नहीं है। ऐसे में इस पीठ की खास महत्ता है।'' अरोडा ने बताया कि यहां छात्रों को वह ग्रीक भाषा, ग्रीक इतिहास और भारत-यूनान समकालीन रिश्ते के बारे में पढाते हैं। फिलहाल वह इस एकलौते पीठ के एकलौते शिक्षक हैं। इसके विस्तार की योजना है। इंडो-एशियन न्यूज सर्विस |
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