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अंग्रेजी में होती है किताब, यही समझी थी पहली बार : अनिता देसाई

अनिता देसाई विश्व में अंग्रेजी साहित्य का एक जाना पहचाना नाम है। चंद रोज पहले जब अनिता देसाई को साहित्य अकादमी ने अपनी महत्तर सदस्यता प्रदान की तो कई बुध्दिजीवियों ने कहा कि इससे अकादमी स्वयं सम्मानित हो रही है, लेकिन उन्होंने कहा, ''यह मेरे लिए एक यादगार लम्हा है और यकीनन मुझे बड़ी खुशी मिल रही है।'' ऐसी हैं अनिता देसाई।

इनका जन्म सन 1937 में मसूरी में हुआ। मां जर्मनी की राजधानी बर्लिन शहर की रहने वाली थीं और पिता ढाका के। संभवत: उनके घर के अंग्रेजीदां माहौल होने का मूल कारण यही था। अंग्रेजी भाषा के प्रति अपनी रुचि के बारे में उन्होंने कहा, ''चूंकि  पहले पहल मैंने अंग्रेजी में ही किताबों को लिखा हुआ देखा और पढ़ा। इसलिए मेरे बाल मन को ऐसा लगा कि किताबें अंग्रेजी में ही होती हैं।''

अनिता देसाई सात वर्ष की उम्र से ही कहानियां लिखने लगी थीं। वह बताती हैं कि परिवार के लोग मुझे उसी समय से साहित्यिक रुचि का समझने लगे थे। उनकी स्कूल की पढाई दिल्ली में पूरी हुई और सन 1957 में दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा कालेज से अंग्रेजी साहित्य में उन्होंने स्नातक किया।

अंग्रेजी भाषा से जो सिलसिला मसूरी में कायम हुआ था वह और भी गहरा होता चला गया। पहाड़ के कई किस्से और पात्र उनके उपन्यासों का हिस्सा बनने लगे। 'फायर ऑन द माउंटेन' नामक उपन्यास को लिखकर उन्होंने विश्व में अपनी पहचान बनाई। गौरतलब है कि इन्हें तीन बार बुकर पुरस्कार की अंतिम सूची में चयनित किया गया।

अपने साहित्यक योगदान की बदौलत इन्हें पूरी दुनिया में लोकप्रियता मिली और दुनिया भर में इन्हें कई पुरस्कार मिले। भारत सरकार ने भी इन्हें पद्मश्री अलंकरण से सम्मानित किया। सन 1993 में इस्माइल मर्चेंट ने इनके उपन्यास 'इन कस्टडी' पर एक फिल्म भी बनाई है।

4 दिसम्बर 2007

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

           
 

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