मुखपृष्ठ  |  कहानीकविता | कार्टून कार्यशालाकैशोर्यचित्र-लेख |  दृष्टिकोणनृत्यनिबन्धदेस-परदेसपरिवार | फीचर | बच्चों की दुनियाभक्ति-काल धर्मरसोईलेखकव्यक्तित्वव्यंग्यविविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन स्वास्थ्य |
साहित्य कोष | समाचार |

 

 Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 Click & Connect : Prepaid International Calling Cards 

 

विजेता

कभी-कभी यह होता है, जो कुछ अनुभव में घटित हो रहा है वह नामालूम तरीके से एक रूटीन के तहत गुजर जाता है और बाद में वह गुजरा हुआ बार-बार हर क्षण महसूस होता रहता हैअनुभव बीत जाता है अनुभूति का एहसास भीतरी तहों में दुबक कर बैठ जाता हैपहली और दूसरी, शायद तीसरी बैठक तक मरीज थी, वे चिकित्सकऔर शायद तीसरी बैठक के बादहां, तीसरी बैठक के बाद ही वे चिकित्सक से उसके सर्वश्रेष्ठ हो गए, वह मरीज से उनकी दीवानी हो गई जब उम्र में कच्चापन था, तब जब उसने जिस सर्वश्रेष्ठ की कल्पना की रही होगी शायद, वह पैतींस के लपेटे में है और उनके नाम के आगे बडी-बडी ड़िग्रियां लगी हुई है तो चालीस से कम भी नहीं होगेजब वह उम्र के खूबसूरत और ताजा मोड पर भी थी और खूब अच्छी तरह जानती थी कॉलेज के जूनियर, सीनियर लडक़े और एडहॉक के पिपरसानिया सर उस पर कुर्बान है, तब भी वह किसी की ओर आकृष्ट नहीं हुई थीउन दिनों उसे अपने अनिंद्य सौंदर्य का कुछ इस कदर गुमान था कि वह किसी को अपने जोड का नहीं समझती थीउसे किसी सर्वश्रेष्ठ की तलाश थी, तलाश नहीं प्रतीक्षा थीऔर उसे विश्वास था ईश्वर ने कहीं, एक सर्वश्रेष्ठ उसके लिए रख छोडा है जो उसे निश्चित रूप से मिलेगा

उसे सर्वश्रेष्ठ की साध थी और पति रूप में निहायत औसत किस्म का केशव मिल गयाउसने भाग्य का लेख मान कर केशव को स्वीकार तो कर लिया, पर विरोधस्वरूप उससे जरूरत भर को बोलती थीवर्ष, दो वर्ष बाद जब सहज रूप से बोलने लगी तब केशव हंसा - '' अम्बिका, मैं तो डर गया था पंडितजी ( अम्बिका के पिताजी) ने मुझे गूंगी लडक़ी थमा दी है, पर नहीं, तुम्हे तो बोलना आता है''

और इस तरह सब ठीक-ठाक चलने लगा तो फिर अब क्या हो रहा है? अम्बिका को किसी परिवर्तन की चाह है? या उसका आसमानी सर्वश्रेष्ठ डॉ व्यास के रूप में अवतरित हो गया है? कुछ तो हैअम्बिका, डॉ व्यासउनका चेहरा, उनका स्वर, उनका व्यक्त्वि अम्बिका पर सम्मोहन डाल रहा हैएक भंवर है, डूब जाने के जोखिम से भिज्ञ होते हुए भी जिसमें डूब जाने को जी करता है

अम्बिका चिकित्सक के पास नहीं जाना चाहती थीउसे औषधि और इंजेक्शन से तो अरुचि है ही, उससे भी बडा भय यह कि डॉक्टर कोई गम्भीर बीमारी बता देंगे और वह उस बडी बीमारी का नाम सुनकर पहले से अधिक पीडित, आतंकित और रुग्ण हो जाएगीअम्बिका इधर के एक दो वर्षो में अजब सुस्ती, उदासी, निराशा, निष्क्रियता, अवसाद से घिरती गई हैसब कुछ वैसा ही चल रहा है जैसा विगत पद्रंह वर्षो से चला आ रहा है, इसलिए वह अपनी उदासी और शिथिलता का कोई प्रत्यक्ष कारण नहीं बता सकतीउसे नहीं मालूम क्या करना चाहती है, पर कुछ करना चाहती हैउसे नहीं मालूम क्या पाना चाहती हैकुछ कमी सी लगती है और जब ढूढने लगती है तो पाती है उसके पास सब कुछ हैफिर क्या? पता नही, जीवन, जगत, केशव सब नीरस, निरर्थक, निष्प्रयोजन लगते है अनिद्रा, भूख न लगना, वजन घटना और अब उदर शूल

'' खुश रहा करो, तुम खुश रहती हो तो घर का माहौल अच्छा रहता है।''

केशव अपनी व्यवसायिक व्यस्तता के बीच यह सरल सी बात कहता तो अम्बिका सोच में पड ज़ाती - केशव कभी भी किसी स्थिति को देखकर असहज क्यों नहीं होताऔर जब इंट्राक्यूनाल के वृहद सेवन से उदर शूल नहीं रुका तो केशव ने दर्द को गंभीरता से लेते हुए अपने घर से थोडी दूर रहने वाले अपने मित्र श्रीनिकेत से चर्चा की -

'' अम्बिका को किस डॉक्टर को दिखाना चाहिए?''
''
केशव, तुमने अब तक बताया नहीं। यहां मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर रविकिरण व्यास है, वे मेरे बहुत अच्छे मित्र है। गेस्ट्रोइंट्राक्यूनॉल, गेस्ट्रो इंटस्टाइनल एन्डोस्कोस्कोपिस्ट उनके नाम के साथ पता नही कितनी डिग्रियां जुडी हुई है। उनका डायग्नोसिस बहुत अच्छा है। दर्द कैसा भी हो आगे चल कर खतरा बढाता है।दिखा लो।''

और अम्बिका को चिकित्सक के पास जाना पडाडॉ व्यास के घर के गेट पर नेवी ब्लू मारुति खडी थीअम्बिका कार का नम्बर देख कर बोली -

'' कितना मजेदार नम्बर र्है दस बीस ( एक, शून्य, दो, शून्य)।''
''
व्यास का काम निराला है तो उसकी कार का नम्बर भी निराला है। चलिए चार सौ बीस नही है,'' श्रीनिकेत ने मजाक करने की कोशिश की।

जल्दी ही डॉ  व्यास अवतरित हुए अम्बिका को नही मालूम, सबसे पहली बार वे कैसे दिख रहे थे

'' अरे श्रीनिकेत। आओ, आओ। यहां ड्राइंग रूम में आओ।''

अम्बिका को नहीं मालूम तब उनका स्वर कैसा था

'' पेशेन्ट लाया हूं।'' श्रीनिकेत उठ कर खडा हो गया। केशव और अम्बिका भी।
''
अच्छा।'' डॉ  व्यास ने केशव और अम्बिका को बारी-बारी विलोका।

अम्बिका को नही मालूम उनकी चितवन कैसी थी

श्रीनिकेत ने परिचय कराया - '' ये मेरे मित्र केशव पुराणिक और ये इनकी धर्मपत्नीतुम्हारी पेशेन्ट''
'' आइए, अन्दर आइए
'' डॉ व्यास सबको कर्लाकक्ष में ले आएअम्बिका को नही मालूम तब उनका चेहरा कैसा था
'' हां, बताइए
'' डॉ व्यास ने अम्बिका को ताका
अम्बिका के स्थान पर केशव ने बताना शुरू किया - '' सर, इधर कोई एक साल से ये सुस्त''
'' पेशेन्ट को बताने दीजिए
'' डॉ व्यास हाथ के संकेत से केशव को रोक कर अम्बिका से बोले -
'' हां, बताइए
''
'' पेट में दर्द और भारीपन रहता है
ठीक से समझ नही आता पेट भारी है या दर्द हो रहा हैभूख नही लगती, नींद नहीं आती, वजन कम हो रहा है, सुस्ती बनी रहती है'' अम्बिका ये यही प्रमुख समस्याए बताई
'' और कुछ?'' अम्बिका ने फिर भिन्न प्रकार से घुमा फिरा कर वहीं बातें कई बार दोहराई
वस्तुत: उसे लग रहा था वह अपनी बात ठीक से कह नही पा रही है
'' ठीक है
'' डॉ व्यास सोफे से उठे और अम्बिका के पास दीवान पर आ कर बैठ गए

अम्बिका को नही मालूम उनकी देह परिमल कैसी थीडॉ व्यास ने उसकी नाडी पकडक़र पल्स रेटिंग देखीजीभ और आंखो की जांच की रक्त चाप मापाआला लगा कर छाती और पीठ की जांच कीदीवान पर लेटने को कहा और पेट मे उंगलियो से दबाब डालकर जांचा-परखाअम्बिका ने बाई ओर संकेत कर बताया कि किस स्थल पर दबाने से अधिक दर्द हुआ

अम्बिका को नहीं मालूम उनका स्पर्श कैसा थाउस सबके उपरान्त डॉ व्यास बरान्डे में रखी वेइंगमशीन उठा लाए -

'' वजन लीजिए तो '' अम्बिका मशीन पर खडी हो गई और डॉ व्यास भूमि पर ऊकडूं बैठ कर रीडिंग देखने लगे
''
सिक्सटी। अरे तो आप की ऊंचाई के अनुसार यह आदर्श वजन है।''
''
इधर आठ-दस किलो वजन घटा है।''
''
तब आप ओवर वेट रही होगी। लोग तो वजन घटाने के लिए बडे ज़तन करते है।आपका वजन सही है।'' डॉ व्यास हंसते हुए बोले।अम्बिका को नही मालूम उनकी हंसी कैसी थी।
''
खांसी आती है? ''
''
नहीं।''
''
सांस फूलती है?''
''
नहीं।''
''
बुखार? चेस्ट में पेन?''
''
नहीं।बस लॉस ऑफ एपेटाइट। लॉस ऑफ वेट और पेट दर्द।''
''
तनाव तो नही रहता?''
''
नहीं तो।''

अम्बिका ने डॉ व्यास के चेहरे पर सरसरी निगाह डालकर पलकें झुका लीअम्बिका किसी पुरूष से दृष्टि मिलाकर बात नहीं कर पातीउसकी पलकें या तो बार-बार झपकती है या दृष्टि को साधे रखने के प्रयास में चेहरा कुछ खिंच सा जाता है डॉ व्यास ने पर्चे में ब्लड शुगर, ई एस , चेस्ट एर्क्सरे, एब्डामन अल्ट्रासाउन्ड आदि जांच कराने के निर्देश लिख दिए थे

'' ये टेस्ट कराने होगे।''
''
तुम्हारी क्या ओपीनियन बनती है?'' श्रीनिकेत ने औचक पूछ लिया।
''
ओपीनियन रिर्पोट के बाद दूंगा। आज मेडिकल साइंस इतना विकसित हो गया है, तो हमें जांच के बाद ही कोई राय कायम करनी चाहिए।''

घर पहुंच कर अम्बिका शिथिल थी और केशव उसे देर तक समझाता-संभालता रहाफिर सब कुछ चमत्कारिक ढंग से घटता गया

अम्बिका को संभावित बीमारी ने निराश किया, पर अनूठा एहसास भी हुआएक नया अनुभव, जो अब तक नहीं हुआकभी सोचा नहीं था, ऐसा होता हैअब डॉ व्यास फकत एक चिकित्सक नहीं थेवे अम्बिका को लगभग चमत्कारिक ढंग से अपनी ओर खींच रहे थेअम्बिका रात में बिछावन पर आई तो जेहन में डॉ व्यास ठहरे हुए थे - छ: फुटी गेहुंआ आकृतिअम्बिका को सबसे पहले उनका स्पर्श याद आयाडॉ व्यास ने उसकी नब्ज देखने हेतु उनकी कलाई में पडी चूडियो को उंगलियों से सरकाया थापीठ पर आला रखते हुए चोटी आगे की ओर की थीआंखो की जांच करते हुए पलकों पर अंगूठे को टिकाया थाअम्बिका ने पलकें मूंद कर उनपर बहुत मुलायमियत से तर्जनी फेरीपलकों में इस तरह सिहरन हुई जैसे डॉ व्यास का स्पर्श अभी वहां हैपेट पर उनकी गर्म उंगलियो का दबाब अब भी बना हुआ हैडॉ व्यास आपका गरम-करारा स्पर्श जादुई हैशायद आपके स्पर्श से तरंगे उत्पन्न होती हैं जो मुझे आवेशित कर रही हैअम्बिका को याद आया वेइंग मशीन पर उसका वजन देखने हेतु वे उकडूं बैठकर मशीन पर झुके हुए थे डॉ व्यास यह आपकी बहुत सरल पर बहुत प्रभावी मुद्रा थीडॉ व्यास की हंसी - डॉ व्यास ऐसी संयत, सलीकेदार हंसी मैने पहली बार ही देखी हैआप शायद जानते है हंसने का तरीका मनुष्य के व्यक्तित्व को बनाता और बिगाडता हैडॉ  व्यास की दृष्टि - यह दृष्टि अम्बिका को एने चेहरे पर फिसलती हुई मालूम हो रही थीडॉ व्यास आपकी दृष्टि की भेदन क्षमता असाधारण हैडॉ व्यास का चेहरा - इस चेहरे की खासियत? हां, डॉ व्यास आपके दांत बहुत उजले है जो आपके तेजस्वी चेहरे को प्राकृतिक चमक देते है और यह जो बात करते हुए आप क्षणांश के लिए पलकें मूंद कर खोलते है वह अद्भुत है, मैने पुष्प को कभी खिलते हुए नहीं देखा फिर भी सोचती हूं वह इस तरह बहुत आहिस्ता और नरमाई से खिलता होगाडॉ व्यास की उम्र - डॉ व्यास आप बहुत युवा दिखते है, पर इतनी बडी-बडी ड़िग्रियां और अब स्थापित चिकित्सक है तो चालीस से कम नहीं होगे

अम्बिका बडी देर तक उनकी उम्र के आंकडों में उलझी रहीअम्बिका की दशा विचित्र थी डॉ व्यास जब बहुत समीप थे तब उनका समीप होना नहीं जाना और इस वक्त जब वे अपने घर में मीठी नींद सो रहे होंगे तब उनके समीप होने का बोध हो रहा हैजी चाहा कार स्टार्ट कर इसी वक्त डॉ व्यास के घर पहुंच जाए - डॉक्टर साहब मुझे कुछ हो गया है आप कलीनिकली एक्सप्लेन करेंगे मुझे क्या हुआ है? पल्स देखिएब्लड प्रेशर मापिए स्टेथोस्कोप से जांच? अच्छा ये पेट में दर्द इस तरफ जो रात अपनी शांति और निस्पंदन के कारण अम्बिका को उदार और मलिन लगती थी वह आज सुंदर लग रही हैबहुत दिनों के बाद, वर्षो बाद उसने पुलक में भरते हुए करवट बदली और सामने केशव दिख गयासांसो का संतुलन बताता है केशव गहरी नींद में है

अम्बिका निद्रामग्न केशव को देखती रही केशव बहुत नियमित लगभग तराशी हुई दिनचर्या जीता हैइसकी दिनचर्या में जोड-घटाव की गुंजाइश नही होतीअम्बिका को उसे प्रत्यक्षत: कोई शिकायत, जो सचमुच शिकायत मानी जाए, नहीं हैबस बहुत सी छोटी-छोटी आम किस्म की रूठने मनाने वाली शिकायतें रही हैफिर भी वह इधर के वर्षो में अजब खीज, चिडचिडेपन से भरती गई हैसंबंधों की नियमितता और एकसरता से उपजे ठहराव, ठंडेपन, सडांध, जडता के कारण उसके भीतर का वह सब मरता गया है जो कभी जीवित हुआ करता थावह घंटो अकेली पडी रहती चाहती मस्तिष्क में विचारों का दबाव न रहे और शून्यात्मक स्थिति में विश्राम की अवस्था में पडी रहे गहन विषाद और निराशा का दौर ऐसा आया जब उसे लगने लगा कि जिंदगी को जिस तरह जी रही हैउस तरह नहीं जीना चाहती है किस तरह जिए, नहीं जानती, बस इस तरह नहीं इस तरह जीते हुए सब कुछ रस्म अदायगी सा लगने लगता है - प्रायोजित सानियतिबध्दएक बाध्यतावह वैसे भी मितभाषिणी रही है और इधर एक-दो वर्षों में उसका केशव से जरूरी बातों के अलावा सीधा संवाद कम ही हुआसोचती अवश्य कि दिन भर के बाद जब केशव लौटेगा, वह उसका जोरदार स्वागत कर दिन भर का ब्योरा देगी, पर जब केशव सामने आता तो उस पर एक श्लथ भाव तारी हो जाता और लगता उल्लेखनीय कुछ भी घटित नहीं हुआ जिसे रेखांकित कर केशव को बताया जाएअम्बिका अपने अवसाद का कारण ढूंढती तो कारण न मिलताकमी? प्रत्यक्षत: कुछ भी नहींअसंतोष, अतृप्ति, तृष्णा मालूम नहीं फिर क्या? पता नहीं

और आजआज डॉ व्यास के संदर्भ में सोचते हुए उसे एकाएक सब कुछ अच्छा और सुंदर लगने लगा हैजिंदगी भीजिंदगी कैसी भी हो इतनी महत्वहीन नहीं होती कि बाध्यता की तरह जी जाएअम्बिका की इच्छा हो रही थी, जाए और डॉ व्यास को ध्यान से, खूब गहरी दृष्टि से देखेपर अब तो बांबे वाली रिर्पोट आ जाने के बाद ही संभव होगाजो कि दस दिन बाद मिलेगी डॉ व्यास की सीढियां चढते हुए अम्बिका ने श्रीनिकेत से पूछ ही लिया -

'' डॉ व्यास की बडी ख्याति है जबकि उम्र कुछ खास नहीं होगी।''
''
मेरी ही उम्र के है चालीस-बयालिस के। व्यास की पत्नी भी डॉक्टर है। उनकी पोस्टिंग इटारसी में है।''

डॉ व्यास की पत्नी का यहां न होना अम्बिका को अपने अनुकूल प्रतीत हुआउसका चेहरा चमक उठा वह अपने आप में मुस्करा दी बेल बजाने पर मिठ्ठू बाहर निकला और उन लोगो को ड्राइंग रूम में बैठाकर अंदर चला गयाजल्दी ही डॉ व्यास आ गए

'' कैसी है आप?''

अम्बिका ने लक्ष्य किया, उसे देखकर डॉ व्यास की आंखे उत्साह से खिल उठी है

'' यह तो रिर्पोट देख कर आप ही बताएंगे।'' अम्बिका ने बडी मोहक मुद्रा में गर्दन तिर्यक करके कहा।
''
देखे रिर्पोट क्या कहती है। वैसे आज आप स्वस्थ दिखाई पडती है। पहले दिन नर्वस दिख रही थी।'' डॉ व्यास रिर्पोट देखने लगे -
''
यस , इन्फेक्शन है, कॉक्स एब्डामन। अच्छी बात ये है कि इनीशियल स्टेज में डायग्नोस हो गया। यह रोग दुसाध्य नहीं है।'' डॉ व्यास पर्चा लिखते हुए अम्बिका को बहुत कुछ समझाते
''
वे फीस नहीं लेते है और बार-बार जाना भद्दा लगता है। एक माह बाद बुलाया है, तभी चलेगे।''
''
उन्होने कहा था कि बीच में कोई तकलीफ हो तो आ जाएं। मुझे तकलीफ है। मैं हार्ट डिसीज, कैंसर पता नहीं क्या-क्या रात भर सोचती रही और तुम गंभीरता से नहीं ले रहे हो।''
''
अम्बिका तुम शारीरिक रूप से कम मानसिक रूप से अधिक बीमार हो। धैर्य से काम लो।''
''
तकलीफ रहे तो धैर्य छूटने लगता है।'' अम्बिका ने तीक्ष्ण स्वर में कह दिया।
''
देखते है, श्रीनिकेत से बात करूंगा।'' अम्बिका गरम हो जाए तो केशव इसी तरह आत्मसमर्पण कर देता है।
''
श्रीनिकेत क्यों?''
''
श्रीनिकेत की उपस्थिति में डॉक्टर साहब फीस लेने में सकुचाते है, हम अकेले जाएं तो ले लेंगे।''
''
ले ले, तो अच्छा। संकोच तो न होगा।''

डॉ व्यास ने अम्बिका का ब्लडप्रेशर लियास्टेथोस्कोप से जांच की, पेट टटोला कहने लगे -

'' आप अम्बिका जी घबरा गई है।आप सोचती अधिक है।''
''
हां, कैंसर तक पहुंच चुकी है।'' जवाब केशव ने दिया।
सुनकर डॉ व्यास, अम्बिका की ओर देखकर हंसने लगे -'' मैं बैठा हूं न।''

कुछ है इस दृष्टि मेंएक ऐसा समर्पित भाव जैसे, डॉ  व्यास सिर्फ उसी के लिए बने है

'' आपको दिखा लिया तो अब अच्छा लग रहा है। मैं सचमुच बहुत डिप्रेस्ड थी।''
''
मैं कहता था, कुछ नहीं बेकार आपको परेशान किया।'' केशव संकुचित हो आया।
''
यहां न आती तो परेशान रहती। डॉक्टर कह दे, चिंता की कोई बात नहीं, इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव मरीज पर पडता है और वह स्वस्थ अनुभव करता है। अम्बिका जी ये एक लंबा कोर्स है, धैर्य चाहता है। टेंशन मत लीजिए। वैसे आज की सबसे बडी समस्या टेंशन ही है। वर्क प्रेशर, टेंशन, पोलुशन तनाव को दूर करने के लिए हमें फिर से ध्यान और योग की ओर लौटना चाहिए। तनाव मुक्ति के लिए शवासन उत्तम साधन है। मैने जब से शवासन और टहलना शुरू किया, रिलेक्स रहता हूं। आपके लिए टहलना और शवासन लाभप्रद होगा।''

बात समाप्त करते हुए शायद उन्हे ध्यान आया हो, वे अम्बिका पर ही केंद्रित रहे हैअत: केशव की ओर मुखातिब हुए -

'' पुराणिकजी, शवासन आप भी कर सकते है। वर्क टेंशन तो आपको भी रहता होगा।''
''
अभी तो सबसे बडा टेंशन धर्मपत्नी का है।'' केशव ने तर्जनी से अम्बिका की ओर संकेत किया।

इस पर डॉ व्यास अम्बिका की ओर देख कर हंसेवह हंसी अम्बिका की नसों में विद्युत धारा बनकर प्रवाहित होने लगीबोली -

'' आप एलेपैथी वाले ध्यान-योग पर आस्था रखते है, यह अद्भुत है।''
''
परिणाम को देखकर आस्था हो जाती है। मैं भी कभी डिप्रेशन का शिकार हो चुका हूं और ध्यान से लाभ हुआ है। ध्यान के अभ्यास से शरीर की पूरी रासायनिक क्रिया में परिवर्तन आता है जो मानसिक-शारीरिक व्याधियों को दूर करने में हेल्प करता है।''

अम्बिका पूछना चाहती र्थी डॉ व्यास आपके डिप्रेशन का कारण? आपका जीवन चक्र? मेरे बारे में आपकी राय? नहीं पूछ सकीविवेक का सख्त नियत्रंण और चेतना पर पडता यथार्थ का दबाव साहस को क्षीण कर देता हैचलते हुए केशव ने सौ का नोट टेबिल पर रखे पेपर वेट से दबा दियासेंटर टेबिल पर ही बटुआ रखा था

'' औपचारिकता न करें।'' डॉ व्यास वह नोट अम्बिका के बटुए में डालने लगे।
''
नहीं प्लीज।''

बटुआ छीनने के प्रयास में अम्बिका और डॉ व्यास के हाथ टकरा गएडॉ व्यास ने अनायास अथवा सायास अम्बिका की कलाई पकडी और नोट उसकी हथेली पर रख दिया - '' बिल्कुल नहीं'' जब तक अम्बिका समझ पाती, उस क्षण क्या घट गया, तब तक डॉ व्यास उसकी कलाई मुक्त कर चुके थेओहओह डॉ व्यास आपने ये क्या किया? मेरा सब कुछ हरण कर लिया

आगे