![]() |
मुखपृष्ठ | कहानी | कविता | कार्टून | कार्यशाला | कैशोर्य | चित्र-लेख | दृष्टिकोण | नृत्य | निबन्ध | देस-परदेस | परिवार | फीचर | बच्चों की दुनिया | भक्ति-काल धर्म | रसोई | लेखक | व्यक्तित्व | व्यंग्य | विविधा | विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन | स्वास्थ्य
|
|
Home | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | Feedback | Contact | Share this Page! |
|
|
|
अभिव्यक्ति एक्सप्रेस के दफ्तर में अचानक सन्नाटा पसर गया। ब्यूरो से लेकर डेस्क तक सबके चेहरे पर मातम छाया था। इंक्रीमेंट को लेकर पिछले कई महीने से मामला अटका हुआ था और आज चीफ एडिटर ने सबके सामने दो टूक शब्दों में मैनेजमेंट का फैसला सुना दिया कि इस साल किसी का इंक्रीमेंट नहीं होगा। सब सन्न रह गए। यह बात उन लोगों के लिए सदमें जैसी थी, जिनका पिछले साल भी एक पैसा नहीं बढ़ा था। लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा। किसी को कुछ कहने का मौका भी नहीं दिया गया। सन्नाटा कायम रहा, लेकिन बहुत देर तक नहीं। कशमशाहटों और खुशफुशाहटों के साथ की-बोर्ड पर उंगलियां टकटकाने लगीं। टेलिप्रिंटर किरकिराने लगे। पन्ने फड़फड़ाने लगे। खबरें बनने लगीं। हेडिंग गढ़े जाने लगे। बांग्लादेश में इमरजेंसी, सूलगता सोमालिया, अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय, मानवाधिकार खतरे में, बेघर हुए आदिवासी, बेरोजगारों पर फायरिंग, मुआवजे में देरी, करोड़ों का घोटाला, लाखों की धोखाधड़ी, साजिश का पर्दाफाश.।
|
|
|
मुखपृष्ठ | कहानी | कविता | कार्टून | कार्यशाला | कैशोर्य | चित्र-लेख | दृष्टिकोण | नृत्य | निबन्ध | देस-परदेस | परिवार | बच्चों की दुनिया | भक्ति-काल धर्म | रसोई | लेखक | व्यक्तित्व | व्यंग्य | विविधा | विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन | साहित्य कोष |प्रतिक्रिया पढ़ें! | प्रतिक्रिया लिखें! |
|
Home | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | Feedback | Contact |
|
(c) HindiNest.com
1999-2012 All Rights Reserved. A
Boloji.com Website |
ठ