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जीबन जीबन का ह? रहस्य बा ई अनोखा चलत रहे का मंतर इम्मे कौउन है फूँका? अजब बा ई पहेली एक को खोलौ तो दूजा उलझे जीवन का ई गुत्थी, भवा सुलझाये न सुलझै। का बताई, अब तोहके, हुयै लोग बहुत ज्ञानी, बोलत हैं विज्ञान की बानी। पर जीवन के बुझै में, बन गयो भवा यो भी अज्ञानी। पढ़ा रहे किताबन में, जीवन बा, सूरज का रोशनी में, पानी की बूंदन में, माटी में बा आग और अकाशो में बा, हवो में बहत ह जीवन, अमित कुमार सिंह
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