प्रेम
अभही चुका नहीं
है
बेहद
प्रचलित यह शब्द
प्रेम
अर्थ की
गरिमा और पवित्रता के
साथ खड़ा
है तनकर
मैं चाहता
हूँ टांक दूं उसे
तुम्हारे
जूड़े में फूल की तरह
उनकी
पंखुड़ियों में खिल रही हैं इच्छाएं
आ रही है
लगाव की महक
यकीनन
चिड़ियां - चहकना
और हवा
बहना नहीं छोड़ेगी
बिना जाने
भी
प्रेम की
परिभाषा।
हरीश
करमचन्दाणी
जुलाई 1 , 2006
Top