गीत
तुम बनो गीत

तुम बनो गीत तुम्हें गुनगुना लूं
आओ पलकों पे मैं तुमको बिठा लूं

अब तो मिलना नहीं आसां चलो यूं कर लें
ज़र्रे - ज़र्रे बनो तुम और मैं नज़रें झुका लूं

आग के दरिया में देखा है लहू आदम का
जी तो करता था कि मैं वही बच्चा बचा लूं

ये है मालूम कि आएगा नहीं कोई यहां
फिर भी ठहरो ज़रा दो चार दरियां बिछा लूं

वक्त हाथों में बन्द रेत सा कब का सरका
तुम ज़रा से स्र्के एक आखिरी मैं गीत गा लूं

 

अरविंद असिया
जुलाई 1 , 2006

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