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सुनो मेरी खामोशी कुछ कहती है रात की नीरवता किसने तोड़ी ? प्यार की ये मीठी धुन किसने छेड़ी ? सिर्फ हम तुम और निशा की निस्तब्धता के बीच दो दिलो की धड़धड़ाहट जैसे आँखों में नींद की आहट अपने हाथों में लेकर मेरा हाथ तुम्हारा युँ मेरी कविता गुनगुनाना मुझे समझाती है - जाओ ! भोर होने से पहले इक सपन सुनहला दे रहा है दस्तक तुम ख्वाबों में आने को हो ! मुकेश सोनी
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