Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 Click & Connect : Prepaid International Calling Cards 

 
चैनल्स  

मुख पृष्ठ
समाचार
कहानी
कविता
कार्यशाला
कैशोर्य
चित्र-लेख
दृष्टिकोण
नृत्य
निबन्ध
देस-परदेस
परिवार
फीचर
बच्चों की दुनिया
भक्ति-काल धर्म
रसोई
लेखक
व्यक्तित्व
व्यंग्य
विविध
संस्मरण
सृजन
स्वास्
थ्य
साहित्य कोष
 

 

 

 

शरद  

पत्नी के इरादे सी पाषाण

बस, नाराज हो कर  देती कंपकंपी

बेरुखी ऐसी

जैसे निश्चल हवा का  स्पर्श - गुमसुम

 तीर की तरह घुसती

शिकायती फुसफुसाहट कानो में

 तूफानी चाल से

तुषार की  माला यों  फॆंकी

बिखरा दिये कीमती सफेद मोती

अब सन्नाटा चुभ रहा सुइयों  की तरह

 

कब पिघलेगा मौसम का हृदय ?

घेर लिया उच्छवास ने  

धुंधलके में

कोड़े सी लगती शीतलहर

और तभी

लाल कपोलों पर रसीले ओंठ

आमंत्रण देते

गरमाहट की बाहों में आलिंगन करने

दहकती सांस मिल गई प्रेम की

क्या समझूं इसे?

कि मैं, शरद और अलाव

याने

पति पत्नी और वो !

 

  - हरिहर झा
अक्टूबर 1, 2006

 

 

 

 

 

Top

मौसम 

सर्दी आई तो

सिकुड़ गये प्राण

 छीन  गई हृदय की उष्मा

जिसमे पंखुड़ियां खिल खिल जाती थी

अबोध चिड़िया मीठे गाती थी

बस, डरा धमका कर

कुरेद गई सिहरन से कम्पित घाव को

खामोश रह कर देखता हूं इस बदलाव को

 

और अब महसूस करता हूं बेचैनी से

गर्मी में करवट बदल बदल कर

पसीने में लथपथ  जीजिविषा

 तबाही मची है

गतिमान हो कर बह निकली चासनी अंगप्रत्यंग से

चिन्गारियों का यह सिलसिला

जाने कब तक जारी रहेगा

कौन सुलझा पायेगा मौसम की

इन गुत्थियों को

 

सामने संगमरमर की तराशी हुई मूर्ति

अपने ताज पर

सहनशीलता का भर लिये ऐंठी है

चटख जाने के डर से

अपने वातानुकूलित कक्ष मे बैठी है

 

बाग में पंखुड़ी

जो सहती है सब कुछ चुपचाप

वितरागी हो कर झुलस जाती है

उसके धर्मग्रन्थ मे यही लिखा है

कि पंखुड़ी झुलसती है

फिजा मे फिर से शामिल होने के लिये

 

लेकिन जब कर दिया झुलसने से इन्कार

एकता के हार ने

मूर्ति को गले में चुभना शुरू किया

शोषण के लिये दी गहरी सजा

बदबू देकर लिया सताने का मजा

तो हर हालत में

दांत किटकिटाये

डरावनी सर्द रातों मे

या नफरत के गर्म अंगारों में  ।.

 

    - हरिहर झा
अक्टूबर 1, 2006

           
 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल |  धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन साहित्य कोष | समाचार|
प्रतिक्रिया पढ़ें! |                         प्रतिक्रिया लिखें!

Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact

(c) HindiNest.com 1999-2007– All Rights Reserved. A Boloji.com Website
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : manisha@hindinest.com