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फगुआ


आई है फगुनमा आई फगुआ रे सखि.

कोई करे बरजोरी आई फगुआ रे सखि.

सैयामिले तो खूब नहीं तो यार धरे मोरी बैया.

बड मुहजोरी यह यौवनमा  पकडू मैं तेरी पैया.

ग-अग तपता है सखि री जैसे नदिया रेत.

रतिया खाये काट-काट मोहे जैसे कोई प्रेत.

राधा के संग श्याम खेलते जैसे होली आज.

वैसे ही मेरे सग सजनमा खेले होली आज.

ग-अग मेरा रग दे रग से मुख पे मले गुलाल.

तपन बदन का चूस-चूस ले अंकित कर दे भाल.

कब फिर अईहैं जानी न सखिया ये होली के रात.

ल-मजीराताल-झाल  फिर मनमा के सौगात.

यह संदेशा दे आओ उनको फगुआ का संदेश.

परदेशी हर परदेशी से कहियो आ जाये देश.

मदमाती यह हवा और यह फिजाहो रही मस्त.

मेरे तन के अन्दर-बाहर कोई लगा रहा गश्

अरूण प्रसाद
मार्च 1, 2007 

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