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चितेरे बोल ओ चितेरे बोल तू ! चित्रा यह सुन्दर-मनोहर विश्व का कैसे रचा ? रंग ये इतने चुटीलेµ नीले-पीले पाये कहां से ? भाव नव-नव सृजना के तूलिका में आये कहां से ? मैं चकित हूं, रहस्य अब तो खोल तू ! ओ चितेरे बोल तू ! और यह संगीत-सरिता संवेदना की बह रही कलकल । नृत्य करती लहरियों में भाव उच्छल कह रही छलछल। मैं चकित हूं/कौन यह संगीत ? ओ सुर-साधक बोल तू ! रहस्य सारा खोल तू !
डॉ. राम निवास मानव |
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