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लौटते कभी नहीं 

लौटते कभी नहीं

आँसू में गाए दिन

ओस में नहाए दिन ।

सुधियों कि गोद में

रात-रात जागकर

भारी पलकों में सजे

उलझी अलकों में सजे

बीते जो तुम्हारे बिन ।

लौटते नहीं कभी ।

पहुँच किसी मोड़ पर

रिश्ते सभी छोड़कर

फिर दूर तक निहारते

उस प्यार को पुकारते

फिसले हाथ से जो  छिन

लौटते कभी नहीं ।

 

रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
अप्रेल 1, 2007

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