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लौटते कभी नहीं लौटते कभी नहीं आँसू में गाए दिन ओस में नहाए दिन । सुधियों कि गोद में रात-रात जागकर भारी पलकों में सजे उलझी अलकों में सजे बीते जो तुम्हारे बिन । लौटते नहीं कभी । पहुँच किसी मोड़ पर रिश्ते सभी छोड़कर फिर दूर तक निहारते उस प्यार को पुकारते फिसले हाथ से जो छिन लौटते कभी नहीं ।
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