|
यदि
है
नसीब
तो
इस
कदर
तूने
क्यों
लिखा
ऐ
मेरे
खुदा.
कहते
कि
जग
का
पिता
भी
तू
सारे
कर्म
तेरे
अधीन
हैं.
कण
कण
में
बसते
हो
सुना
आधार
हो
हर
ज्ञान
का.
जीने
का
हक
सबको
मिले
खुद
भी
जीये
जीने
भी
दे.
|
|