मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | फीचर | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन स्वास्थ्य |
साहित्य कोष | समाचार |

 

 Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 Click & Connect : Prepaid International Calling Cards 

You can search the entire site of HindiNest.com and also pages from the Web

Google
 

संवाद 

काम  कितना  कठिन  है  जरा  सोचना.
गाँव
  अंधों  का   हो  आइना   बेचना.. 

गीत जिनके  लिए  रोज  लिखता  मगर.
बात
उन  तक पहुंचे तो कटता जिगर.
कैसे
  संवाद   हो  साथ  जन  से   मेरा
जिन्दगी
   बीत जाती    मिलती  डगर.
बन
के तोता फिर गीता को क्यों बांचना.
गाँव
अंधों  का  हो   आइना  बेचना.. 

बिन  मांगे  सलाहों  की  बरसात  है.
बात
जन तक  जो  पहुँचे  वही बात है.
दूरियां
कम  करूं जा के  जन से  मिलूं
कर
  सकूं  गर  इसे  तो  ये  सौगात है.
बिन
  पेंदी  के  बरतन से जल  खींचना.
गाँव
  अंधों  का  हो  आइना   बेचना..

सिर्फ अपने  लिए क्या  है जीना  भला.
बस्तियों
  में चला  मौत  का  सिलसिला.
 
दूसरे  के   हृदय  तार  को   छू   सकूं
सीख
  लेता  सुमन  काश  ये  भी  कला.
आम
  को   छोडक़र  नीम   को  सींचना
 
गाँव   अंधों   का  हो  आइना   बेचना.

श्यामल सुमन
अप्रेल 16, 2007

 

Top

Advertise Your Site             Advertise Your Site
 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन साहित्य कोष | समाचार |
प्रतिक्रिया पढ़ें! |                         प्रतिक्रिया लिखें!

Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact

(c) HindiNest.com 1999-2008 All Rights Reserved. A Boloji.com Website
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : manisha@hindinest.com