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जाल 

जाल मछुए ने फेंका, सलीके से अब.
मछलियाँ फंस न जाएं
, कहीं सबके सब.. 

कोशिशें, आशियाँ, चाँद पर भी बने.
हमके डर
, चाँदनी कैद हो जाए कब.. 

रू-ba-रू बात, करने से घबराते वो.
होशवाले की मैयत हो
, मुस्काते तब.. 

बात, बातों से बन जाए, तो बात है.
बात बिगडे
, नहीं बात, सुनते वे जब.. 

बिक रहीं, आज कलियां ही बाजार में.
होगा फिर क्या
, सुमन का बता मेरे रब..

श्यामल सुमन
अक्टूबर 1,2007

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