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क्योंकि ये होली है प्रेम
रंग का,
मैं कायल हूं,
क्योंकि ये होली है,
प्रेमसे डालो,
प्रेमको डालो,
मैं प्रेम का प्यासा, हाथों में
रंग,
मत लेना जो,
दिलमें प्यार नहीं है, होली
रंगों,
की झोली है,
प्यार की ही बोली है,
अशोक कुमार वशिष्ठ
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