क्योंकि ये होली है 

प्रेम रंग का, मैं कायल हूं, क्योंकि ये होली है,
प्रेम रूप का
, मैं घायल हूं, क्योंकि ये होली है

प्रेमसे डालो, प्रेमको डालो, मैं प्रेम का प्यासा,
तनसे मन तक
, प्रेमसे भीगे, मेरी हर अभिलाषा,
मैं प्रेमी हूं
, मैं पागल हूं, क्योंकि ये होली है

हाथों में रंग, मत लेना जो, दिलमें प्यार नहीं है,
मुंहसे होली
, मत कहना जो, होली का, सतकार नहीं है,
तू आंखें बन
, मैं काजल हूं, क्योंकि ये होली है 

होली रंगों, की झोली है, प्यार की ही बोली है,
न कान्हा
, राधा सा प्यार, फिरभी ये होली है,
तू पांव बन
, मैं पायल हूं, क्योंकि ये होली है

अशोक कुमार वशिष्ठ
मार्च 1, 2007 

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