तिलिस्म की जमीन

तू
नाच रहा है आज
एक नए तिलिस्म की जमीन पर

कल ही तो टूटी है
जमीन पुराने की

एक के बाद एक
आते रहेंगे
टूटते रहेंगे
तिलिस्म

आखिरी जब टूटेगा

तू गिरेगा
मां – बाप के आंगन में

 

- सुशील गोस्वामी
जुलाई 1
, 2007

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