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नखरारी नार
पिचकारी खेले
ससुरी ऐसे
लुभायमान लगती
रंग से भरी वो
जग किसके रंग
से रंगमय हो रहा
कलाई से पकड़
कोई मसखरी करता
नखरारी नार की
अल्हड़ता कैसी?
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