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  शुतुरमुर्ग - 2

उसकी परेशानियाँ हकीकत थीं, पर मेरी अपनी दिक्कतें थीं पत्नी चूहे मारने की दवा और डीडीटी पाउडर खा कर दो बार मरने की कोशिश कर चुकी थीमेरे बच्चे बिगड रहे थे उनको न मैं देख पा रहा था, न उनकी माँ। घर अस्त-व्यस्त और अव्यवस्थित हो गया थाएक अजीब से नशे की हालत में मैं रहता थाघर में होता तो उसकी और उसके बच्चों की चिन्ता रहती थीमेरे बच्चे यदि किसी चीज क़ी माँग करें तो मुझे उसके बच्चे याद आ जाते थे कि उन्हें ठीक से रोटी भी नहीं मिल पा रही है, और मैं अपने बच्चों को डाँट देता थाजब उसके पास होता तो घर की याद सताती थी सोचता था कि यहाँ पराये बच्चों के साथ हूँ, जबकि मेरे बच्चे लावारिसों की तरह घूम रहे होंगेपत्नी का ध्यान आ जाता कि उसका तो कोई भी कसूर नहीं है, पर वही सबसे अधिक अपमान और जिल्लत सह रही हैवह सीधी-सादी बेवकूफ घरेलू औरत सब कुछ बर्दाश्त कर रही है और मुझसे लडने के बजाय घर संभाले बैठी हैआज तक नौ वर्षों के बीच उसने एक बार भी मेरे इस मामले का जिक्र मेरे माँ-बाप, भाई-बहन या अपने ही किसी रिश्तेदार से नहीं किया थाउसके पक्ष में मेरे मन में यह सबसे बडा तर्क था कि उसने मुझे अपनी दुनिया या अपने समाज के सामने कभी जलील नहीं होने दिया थाकिन्तु इसके बावजूद पत्नी को सुरक्षा थी, सामाजिक स्थिति थी, नाते-रिश्तेदार थे, अडोसी-पडोसी और एक भरा-पूरा संसार थायद्यपि इस संसार से वह भय खाती थीकिसी से मिलने-जुलने से वह कतराती थीउसे शंका रहती थी कि कोई उसे मेरे इस सिलसिले के बारे में कुछ कह न बैठे और उसे जलालत के कीचड में धंसना पडेमेरे अवचेतन में यह सब चल रहा था और मैं सन्तुलन खोता जा रहा थामैं उसके प्रलाप से ऊब उठा था

कहा,  ''बकवास बन्द करो और चलो''

घर पहूँचे तो नौ बज चुके थेदो चारपाईयाँ थींएक पर मच्छरदानी लगी थी बच्चे उसी में सो रहे थे बिना खाये-पियेखाना तो बना ही नहीं था हम लोग भी उसी में घुस गए मैं, चूंकि दिनभर का थका था, जल्दी ही सो गयारात में आँख खुली तो लगभग दो बज रहे होंगे वह पास ही निश्चल लेटी थी उसकी आँखे खुली थींवह एकटक ऊपर ताक रही थी मैं ने उसके कंधे पर हाथ रखा, उसने हाथ हटा दियादो चार बार इस प्रकार मेरे प्रयास का विरोध करने के बाद वह उठ कर बाथरूम चली गईलौटने पर दूसरी चारपाई पर लेट गईउस पर केवल एक कम्बल बिछा थामच्छरदानी भी न थी कुछ देर मैं ने इंतजार किया कि शायद वह कुछ कहेफिर पूछा,  ''मैं भी तुम्हारे पास आ जाँऊ? ''

'' आ जाओ।''

मैं उसके पास चला गयाउसकी आँखे एकदम शून्य में ताक रही थीं मैं ने फिर उस पर हाथ रखा उसने हटा दियाएक जुनून मुझ पर सवार होता जा रहा थाजितना भी वह मेरा हाथ हटाती उतना ही मैं अधिक कोशिश करता

'' मेरा हाथ दर्द करने लगा है, हटाते-हटाते।''
''
तो क्यों हटाती हो?''
पर उसने फिर मेरा हाथ झटक दिया। कहने लगी, ''तंग करोगे तो मर जाँऊगी।''

पर मैं ने फिर उस पर हाथ रखा

'' मुझे तंग मत करो।'' वह चीखी। उसकी आवाज धीमी पर कटार की तरह तीखी थी।
 मुझे रोका क्यों था? कमीनी, कुतिया। यद्यपि मुझे अहसास था कि मैं बिलकुल जानवर हो गया हूँ। मुझे हैरत हो रही थी कि चरित्र की यह कौन सी कोर मेरे अन्दर छिपी थी जिससे मैं अभी तक अनभिज्ञ था। पर मैं अपने को रोकने में असमर्थ था।

वह अचानक दरवाजा खोल कर बाहर भागी रसोई में पहुँच कर मिट्टी के तेल का डिब्बा उठाया और माचिस खोजने लगीतब मुझे स्थिति की गंभीरता का बोध हुआमैं तुरन्त भाग कर उसके पास पहुंचा ड़िब्बा छीन कर एक तरफ रखा और माचिस अपनी जेब में रख लीउसे उठा कर अन्दर लाया और चारपाई पर लिटा दिया

कुछ देर मैं स्तब्ध पडा रहाथोडी देर बाद फिर मैं ने उसे हाथ लगायावह उठकर भागने लगी मैं ने उसे जकड लिया

मुझे समझा कर वह कहने लगी, ''मुझे मरने क्यों नहीं देते? ''

उसने तीन-चार बार भाग कर रसोई में जाने की कोशिश कीहर बार या तो मैं ने उसे पकड क़र रोक लिया या रसोई तक पहुँचते-पहुँचते उठा लायामेरा जुनून बढता ही जा रहा थास्थिति की नज़ाकत को पूरी तरह से समझने के बावजूद मैं रुक नहीं पा रहा थाकोशिश करके दो-चार मिनट रुकता, पर अन्दर का शैतान फिर मुझे परास्त कर देताएक बार उसके विरोध करने पर उसे उठा कर मैं ने चारपाई पर फेंक दियाउसका हाथ मरोडा और गर्दन दबाईगुस्से से पागल होकर उसे मारा, गालियाँ दींवह रोने लगी अपनी आदत के एकदम विपरीत-निस्सहाय और निरुपाय सी

इस तरह सुबह के चार बजने को आए बाहर सडक़ पर और अडोस-पडोस से कभी-कभी किसी के खांसने-खंखारने की आवाज जातीमैं रुक-रुक प्रयत्न करता जा रहा थाअन्त में वह तैयार हो गई और जब वह बाथरूम जाने को उठी तो मैं चारपाई पर संतुष्ट होकर लेट गया मैं ने पूछा, ''अब तो कोई बात नहीं है? ठीक हो न? ''
''ठीक
हूँ। अब कोई बात नहीं''
मैं ने सोचा, अब वह संतुष्ट और सामान्य हो गई होगी

मैं आलस में पडा रहापर आँख और कान बराबर उसी पर लगे थे क्योंकि यद्यपि यह विश्वास था कि वह अब कुछ नहीं करेगी तथापि आशंका तो थी ही हाथ-मुँह धोकर वह कमरे की ओर बढी मैं निश्चिंत-सा हो गया और लेटा रहा उसने एक कदम कमरे के अन्दर रखा और फिर कदम बाहर हटा कर अचानक दरवाजा फटाक से बन्द कर लिया तथा बाहर से बेलन लगा दियामैं एकदम भौंचक्का रह गयाइकपलिया दरवाजा था अन्दर से उसमें हैन्डल भी नहीं था किसी भी तरह मैं दरवाजा खोल न पाया खिडक़ी से मैं ने देखा - दरवाजा बन्द करने के बाद वह झूमती हुई रसोई में पहुँची। तेल का डिब्बा उठायामाचिस का पैकेट जो जाली की अलमारी में था, निकालामैं उसको अपनी कसमें देता रहाउसे हरचन्द रोकने की कोशिश करता रहाकिन्तु वह तो जैसे किसी बहुत महत्वपूर्ण, गरिमामय और आनन्ददायक कार्य में व्यस्त लग रही थीवह पूरी तरह मस्त, बेफिक्र, आराम से अपना कार्य करती रहीजब मैं ने देखा स्थिति काबू के बाहर हो गई है तो मैं ने दोनों बच्चों को उठा कर खिडक़ी पर खडा कर दिया बच्चे भी चिल्लाने लगे, '' मम्मी दरवाजा खोलो। वे रोने लगे।

उसने एक बार बच्चों को देखा, फिर उनकी तरफ से मुँह फेर कर उंकडू बैठ गईउसने पेटीकोट नीचे से फैला कर एक हाथ में पकडा, दूसरे हाथ से उसपर तेल डाला और माचिस जला कर आग लगा दी मैं और बच्चे चीखते रहे पर उस पर कोई असर न हुआमैं तब तक भी यही समझ रहा था कि मुझे तंग करने के लिये ही वह यह सब कर रही है और यह कि वह सब दिखावा हैमुझे विश्वास था कि वह जल्द ही अपने हाथों से पेटीकोट को दबा कर आग बुझा देगीमैं ने सोचा कि उससे कहूँ कि उसके ऐसा करने से मैं फंस जाँऊगापर यह मैं कह न सका क्योंकि ऐसा कहना मुझे अत्यंत अपमानजनक और अपनी मौत से भी अधिक तकलीफदेह लगापेटीकोट में आग लगते ही जो लपट उठी उसने उसके बालों को पकड लिया जो उसके चेहरे से होते हुए घुटनों तक लटक आए थे, और उसका सिर भभूके की तरह जलने लगाउसके बाद मुझे होश नहीं रहामैं बेतहाशा जोर-जोर से दरवाजा पीटने और चीखने लगापागलों की तरह कभी खिडक़ी पर आकर चीखता था, कभी दरवाजा पीटता थाइस बीच वह आंगन में आकर ढह गई थी

देखते-देखते सैकडों लोग बाहर जमा हो गए थेकोई एक चारदीवारी से कूद कर अन्दर आया और कमरे का दरवाजा खोलामैं ने तुरन्त कम्बल उठा कर उस पर डालातब तक तो वह मर चुकी थी कहीं-कहीं से धुंआ उठ रहा था जीभ दाँतों में दबी थी और मुँह से खून बह रहा थाचेहरा अजीब तरह से सिकुड ग़या थाबाल और भौहें जल गई थीं अब वह वीभत्स और भयानक लग रही थी कमरे के अन्दर आकर मैं ने चाभी ली और चारदीवारी का दरवाजा खोल दियालोगों की भीड अन्दर घुस आई जैसे टूटे नल से पानी का रेला बाहर निकलने को दौडता हैलोगों ने उसे देखा चेमगोइयाँ आरम्भ हुईंमैं लाचार किंकर्तव्यविमूढ ख़डा थाकिसी ने मुझे लक्ष्य करके कहाकम से कम डॉक्टर को तो ले आओमैं भी यही चाहता था कि किसी तरह डॉक्टर आ जाताक्या पता अभी प्राण हों पर स्वयं कैसे कहता? लोग समझ सकते थे कि इस बहाने मैं भागना चाहता हूँ। जैसे ही मैं चलने को हुआ किसी दूसरे ने कहा, इस तरह आप नहीं जा सकतेमैं रुक गयातभी कोई और बोलाडॉक्टर को फोन कर दिया हैकुछ देर बाद डॉक्टर आया देखकर उसने अन्त हो जाने की पुष्टि की

अस्तित्व के संकट में कैसे चेतना हजारों मस्तिष्क से कार्य करती र्है उस समय मैं ने जानाअवचेतन में तुरन्त दो बातों का निर्णय कर लियाएक कि यहाँ से भागना नहीं हैभागना, अपने आपको मुजरिम साबित करना होगादूसरा - कि इस भयंकर स्थिति में हो सकता है कि मेरा विवेक सही काम न करेअत: कुछ ऐसे विश्वसनीय लोग होने चाहिये जो मुझे निर्णय करने में मदद करें या जिन पर निर्णय करने का भार सौंपा जा सके

बगल के मकान में मेरे विभाग का एक कर्मचारी रहता थाबडे लडक़े से मैं ने उसे बुलवाया और एक स्थानीय प्रभावशाली दोस्त को सूचित करने को कहाजब वह पडोसी दोस्त को सूचित करके लौटा तब मैं ने दो-तीन विभागीय दोस्तों के नाम भी उसे बताए और विनती की कि उन्हें भी आने को कह देअन्दर से कहीं था कि कुछ लोग मेरे अपने होंगे तो मुझे हौसला रहेगा, विपरीत और विरोधी भावना वाली भीड क़ा मुकाबला किया जा सकेगा, उसे काबू में रखा जा सकेगाअचानक मुझे ख्याल आया कि कल दिन में सौ रुपये का एक नोट मैं ने उसे दिया थामैं कमरे में आयाबिस्तर पर तकिये के नीचे वह नोट थामैं ने उसे उठाकर जेब में रखा इन विपरीत परिस्थितियों में पैसे का बडा महत्व है, मैं ने सोचाफिर मैं ने अन्दाज लगाया कि मेरे विरुध्द यहाँ क्या-क्या सबूत हो सकते हैं मेरे हाथ के लिखे सैकडों पत्र वहाँ थेजितना संभव हो सका बक्स आदि से पत्र निकाल कर मैं पेन्ट की जेब में रखता और टॉयलेट में जाकर सीट के नीचे घुसेड देतायद्यपि मैं जानता था कि इससे कोई फर्क नहीं पडेग़ा क्योंकि पत्र बहुत बडी संख्या में थे और किसी भी बक्से में, आल्मारी में या कहीं भी किसी जगह हो सकते थेउसकी तनहा जिन्दगी में पत्रों का बडा महत्व थाउसकी कलाई घडी भी वहीं आल्मारी में थीउसे भी मैं ने अपनी जेब में यह सोच कर रख लिया कि वह किसी पुलिसवाले के हाथ पड ज़ाएगी

वह प्रभावशाली दोस्त आयासभी उसे जानते थेदोस्त ने मुझसे पूछा, पुलिस को खबर दी? किसी एक ने जवाब दिया, फोन कर दिया था, पर पुलिस अभी तक आई नहींमैं जाकर लाता हूँ। देर करने से क्या फायदा! दोस्त ने कहाथोडी देर में लौटकर उसने बताया कि पुलिस कहती है किजब तक थाने में आकर कोई एफआईआर दर्ज न कराए, वे नहीं आएंगेउसने मुझसे कहाचलो मेरे साथएफआईआर लिखाओचलो स्कूटर पर बैठो जैसे ही मैं स्कूटर पर बैठने को चला, एक सज्जन बोलेमैं भी चलूंगादोस्त बोलानिकालो अपनी मोटरसाईकिलमोटरसाईकिल खराब है वह बोलेऔर झटपट मेरे पीछे स्कूटर पर बैठ गएदरअसल उन्हें डर था कि कहीं मैं भाग न जाऊं

कोतवाली पहुँच कर दोस्त ने कोतवाल से कहा, यह आ गए हैं एफआईआर लिखानेमैं ने कोतवाल को संक्षेप में बताया, कि हम सो रहे थेरात में कुछ खट-पट से आँख खुलीदेखा, बाहर से दरवाजा बन्द था और वह जल रही थीबस मैं और बच्चे चीखने लगे इसके अलावा मैं कुछ नहीं जानता। हाँ वह कुछ तनाव में थीपिछले दो महीनों से उसे वेतन नहीं मिल थाकुछ दिन पहले ही उसके पिता का देहान्त हुआ है और वह बीमार भी रहती थीकोतवाल ने कहाआप दीवान से कागज लेकर एफआईआर लिख दीजियेइस बीच मेरे पडोसी सज्जन ने कोतवाल को बहुत समझाया कि मुझे बन्द कर दिया जाए, कि मैं ने ही उसे मार कर जला दिया होगाकि मैं बहुत ही दुश्चरित्र हूँ, सारे मोहल्ले और समाज को गन्दा कर रहा हूँ। दरअसल उनके दिल में यह दंश होगा कि एक अकेली सुन्दर और जवान औरत मुझसे ही क्यों जुडी है, उनके हत्थे क्यों नहीं चढतीऔर या यह भी कि उनकी धमनी में कुछ विचित्र शुध्द संस्कार बिलबिलाते हैं कि वह किसी भी प्रकार यह बरदाश्त नहीं कर पा रहे हों कि एक शादीशुदा औरत खुले आम बिना झिझक और बिना शर्म महसूस किये किसी दूसरे मर्द के साथ रह कर धर्म और पारम्परिक मान्यताओं का मखौल उडाएकोतवाल ने सख्ती से कहा लिख कर दे दोएफआईआर लिखावा दो कि इन्होंने उसे मारा है, या इन पर शक हैहम इन्हें बन्द कर देंगे दूसरे पर आरोप लगातो हो तो खुद भी थोडा खतरा उठाओऐसे ही बन्द नहीं करेंगे अगर बाद में चीजें इनके विरुध्द गईं तो ये कहाँ जा सकते हैं? मैं ने एफआईआर लिख दीदो इन्सपेक्टर और पुलिस के जवानों के साथ हम वापस लौटेउन्होंने यहाँ-वहाँ पूछताछ कीदोनों बच्चों से भी अलग-अलग पूछामेरे और बच्चों के बयानों में उनको बस एक ही अर्न्तविरोध मिला कि मैं ने उनको बताया कि मैं अलग सो रहा था जबकि बच्चों ने कहा कि मैं उनकी मम्मी के साथ एक चारपाई पर थापर वे बच्चों के बयान तथा बाकि सारी स्थितियों के आधार पर इस बात से संतुष्ट लगे कि उसके जलते समय मैं कमरे में बंद था तथा दरवाजा खोलने की हरसंभव कोशिश कर रहा था

सारे बयान हुएपंचनामा हुआउन्होंने उसके शरीर को देखा, कहीं कोई चोट या कोई जख्म तो नहीं हैऐसा कुछ नहीं थाफिर उन्होंने उसकी टाँगों तथा जांघों में भी देखना चाहा, जो थोडा बहुत कपडा बचा था उसे हटा करमैं शर्म से जैसे धरती में गड ग़यानौ वर्षों तक जिसे बचाने के लिये मैं अपनी जिन्दगी हल्कान किये हुए था, वह सब कुछ कितना बेमानी साबित हुआमैं ने अपने आपको बहुत ही अशक्त , बेबस और पराजित महसूस कियाइंसपेक्टर ने मेरी दुविधा को समझाकहामर चुकी हैहमें खानापूरी करना है उसने एक उडती सी नजर डाली फिर लाश को कम्बल और चादर में लपेट कर सील करवा दिया

अचानक मुझे ख्याल आया कि दोपहर हो गई है और उसे मरे कम-से-कम आठ घंटे हो चुके हैंइन आठ घण्टों के बीच अपनी सुरक्षा के अतिरिक्त मैं ने कुछ भी और नहीं सोचा थानौ साल तक जो स्त्री मेरे रोम-रोम में बसी थी, जिसे एक पल को भी कभी मैं नहीं भूल सका था और जो तूफान की तरह मेरे जीवन पर हावी थी तथा मेरा हर विचार, कार्य और हर क्षण निर्देश करती थी, मरी पडी थीवह जिस्म जिसका केवल ख्याल ही मुझे आपाद-मस्तक रोमांचित कर देता था और नौ वर्षों के दौरान एक पल को भी जिससे मैं ने ऊब महसूस नहीं की और वह चेहरा जो प्यार के समय किसी लौकिक नारी का चेहरा न रह कर खजुराहो की नायिकाओं के चेहरे के समान मुझे उत्साहित करता था, निर्जीव, वीभत्स और क्षत-विक्षत रूप में मेरे सामने पडा थामुझे उसकी चिन्ता क्यों नहीं थी? मैं जो उसके बगैर बिलकुल भी नहीं रह पाता था और चाहे मैं उससे लड क़र भागता था पर दो-तीन दिन के बाद फिर लौट आता था, क्यों उससे बेखबर केवल अपनी सुरक्षा की चिन्ता में लिप्त था?

सारी औपचारिकताओं के बाद प्रश्न उठा कि बच्चों का क्या हो? मेरे संरक्षण में बच्चों को दिया नहीं जा सकता थाकानूनन मैं उनका कोई नहीं था, पडोसी तक नहींएक पडोसी दयालु थेबच्चों को रखने को तैयार हो गएअगला कोई प्रबंध होने तक घर और बच्चे उन्हें सौंप दिये गएबच्चों के पिता और नानी आदि को तार कर दिये गएमैं कहीं भी जाने को मुक्त था मैं जब अपनी अटैची उठा कर चला तो दोनों बच्चे मेरी टाँगों से लिपट गएतब पहली बार उनकी आँखों में आँसू आएकहने लगेहमें भी अपने साथ ले चलो अंकलहम भी आपके साथ चलेंगे वे कह अवश्य रहे थे, क्योंकि उनकी नजरों में यह बिलकुल स्वाभाविक थाफिर भी वे मेरी मजबूरी जानते थेबच्चे सबकुछ समझते थे बाद में मुझे पता चला कि जब तक मैं वहाँ से चला नहीं आया बच्चे व्यग्र थे कि मैं कहीं फंस न जाऊंइंसपेक्टर जब मुझसे पूछताछ कर रहा था तो बच्चों ने कई बार लोगों से इस बात का जिक़्र किया था

'' मैं कल आकर तुम्हें ले जाँऊगा। तुम बेफिक्र रहो। मैं ने बच्चों को फुसलाया। मैं चल दिया अटैची उठाए। दोनों बच्चे मेरे पैरों पर गिर गए, मैं ने उन्हें सीने से लगा लिया।

वहाँ से दोस्तों के साथ मैं बसस्टैण्ड आयामैं ने चिन्ता व्यक्त कीपोस्टमार्टम में पता नहीं क्या होगा, कि लाश का अंतिम संस्कार कैसे होगादोस्तों ने कहातुरन्त शहर से निकालोवह सब हो जाएगामुझे बस में बिठा दिया सच पूछो तो मुझे भी किसी त&#