मुखपृष्ठ  |  कहानीकविता | कार्टून कार्यशालाकैशोर्यचित्र-लेख |  दृष्टिकोणनृत्यनिबन्धदेस-परदेसपरिवार | फीचर | बच्चों की दुनियाभक्ति-काल धर्मरसोईलेखकव्यक्तित्वव्यंग्यविविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन स्वास्थ्य |
साहित्य कोष | समाचार |

 

 Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 Click & Connect : Prepaid International Calling Cards 

 

वसीयत
नन्द किशोर का संपन्न परिवार था पति-पत्नि व दो बच्चे । पिछले ही वर्ष उनकी पत्नि स्वर्ग सिधार गई । बेटा बाहर नौकरी करता था । बहू भी बेटे के साथ रहती थी । पत्नि के जाने के बाद नन्द किशोर की तबियत ढीली रहने लगी । खाने-पीने को भी मन नहीं होता था, परन्तु उनकी बेटी नीरू माँ के मरते ही जैसे सयानी सी हो गई थी । बार-बार बाबूजी से कुछ खा पी लेने का आग्रह करती, कपड़े सदैव धोकर देती । रात-रात भर जागती व समय पर दवाई देना कभी न भूलती । इस बीच नन्द किशोर की हालत बिगड़ गई, उन्होंने बेटे को बुलावा भेजा, फोन किया परन्तु वो नहीं आया । उस रात तो हद ही हो गई । नन्द किशोर का दम घुटा जा रहा था । बिस्तर से उठने में असमर्थ । नीरू ने सहारा देकर उठाया । गर्म पानी की बोतल दी । उनका थूक साफ किया व पास ही कुर्सी पर बैठे सारी रात निकाल दी । बेटे को दो फोन किये परन्तु छुट्टी नहीं है कह कर टाल गया । नन्द किशोर कुछ स्वस्थ हुए तो उन्होंने वकील को बुलाया व कागज़ात बदल दिये व चैन की साँस ली ।



शबनम शर्मा

लघु कथाएं # | 2 | 3| 4|

 

    

Top

Hindinest is a website for creative minds, who prefer to express their views to Hindi speaking masses of India.

 Advertise Your Site            

 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन साहित्य कोष | समाचार |
प्रतिक्रिया पढ़ें! |                         प्रतिक्रिया लिखें!

Home | Samachar | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact

(c) HindiNest.com 1999-2008 All Rights Reserved. A Boloji.com Website
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : manisha@hindinest.com