मुखपृष्ठ  |  कहानीकविता | कार्टून कार्यशालाकैशोर्यचित्र-लेख |  दृष्टिकोणनृत्यनिबन्धदेस-परदेसपरिवार | फीचर | बच्चों की दुनियाभक्ति-काल धर्मरसोईलेखकव्यक्तित्वव्यंग्यविविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन स्वास्थ्य | साहित्य कोष |

 

 Home | Boloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact | Share this Page!

 Click & Connect : Prepaid International Calling Cards 

 
चैनल्स  

मुख पृष्ठ
कहानी
कविता
कार्यशाला
कैशोर्य
चित्र-लेख
दृष्टिकोण
नृत्य
निबन्ध
देस-परदेस
परिवार
फीचर
बच्चों की दुनिया
भक्ति-काल धर्म
रसोई
लेखक
व्यक्तित्व
व्यंग्य
विविध
संस्मरण
सृजन
स्वास्
थ्य
साहित्य कोष
 

   

 

 

स्पून बिल - जलीय पक्षी  

प्रिय बच्चों,

यह चिडिया स्पून बिल जिसे हिन्दी में चमचा या डाबिल कहते हैं, पालतू बतख से कुछ बडी होती है, लगभग 18 इंच ऊँची होती है इसकी टाँगे और गर्दन लम्बी होती है और रंग एक दम सफेद होता है इसकी चोंच बहुत ही सुस्पष्ट और काफी पीली चौडी तथा चपटी होती है इसकी चोंच का सामने वाला सिरा एक स्पेटुला या चपटे चमचे के आकार का होता है प्रजनन काल में इसके सर पर एक मोरछलनुमा पीली कलगी और गर्दन के आगे नीचे भाग में पीला लम्बा धब्बा उभर आता है

यह चिडिया प्राय: अकेली या 15-20 के समूह में या सारसों या दलदल में रहने वाली अन्य चिडियों के साथ रहना पसंद करती है यह चिडिया वैसे तो भारत में निवास करती है किन्तु शरद ॠतु में बाहर से भी अन्य स्पून बिल चिडियों के आ जाने से इनकी संख्या बढ ज़ाती है

स्पून बिल दलदल, झीलों, नदियों के कीचड वाले किनारों पर रहते हैं यह सुबह-शाम भोजन की तलाश में खूब मेहनत करता है और दोपहर में दलदली किनारों पर आराम कर लेता है यह अपने भोजन के ठिकाने तक पहुँचने से पहले इकहरी तिरछी कतार में, अथवा अंग्रेजी के वी के आकार में धीरे-धीरे पंख लहराता उडता रहता है उडते समय इसकी गर्दन और टाँगे तनी रहती हैं ये बहुत ऊँचाई पर उडते हैं इनका खाना मेंढक और उनके टेडपोल, घोंघें (मोलस्क जाति के जीव) और पानी के कीडे र कुछ मुलायम वनस्पति होते हैं इनका पूरा झुंड उथले पानी में घुस जाता है ये अपनी गर्दन आगे और अधखुली चोंच टेढी क़रके, चोंच की नोक से कीचड उलट-पुलट करती इधर-उधर घूमते हैं यह बोलने के नाम पर हल्का सा गुर्राते-से हैं यह झील के आस-पास पनकौओं, सारसों, बगुलों के साथ पेड पर तिनकों का चबूतरा नुमा घोंसला बनाते हैं ये एक बार में 3 अण्डे देते हैं जो रंग में मटमैले सफेद कहीं कहीं गहरे बारीक कत्थई धब्बे लिये होते हैं इनका नीडन काल जुलाई से नवम्बर के बीच होता है

तुम्हारा मनोज अंकल
स्टेट कॉर्डिनेटर ऑफ इन्डियन बर्ड नेटवर्क

अगस्त
5, 2001


आवाज़ें पक्षियों की 
कठफोड़वा
कस्तूरी    
किंगफिशर  
तोता  
नीलकण्ठ 
बया 
बी-ईटर
मोर
शकरखोरा  
शाह बुलबुल
स्टॉर्क परिवार के पक्षी 
स्पून बिल-जलीय पक्षी
सूरज की शहजादी पीलक 
हुदहुद

Top  
 

Hindinest is a website for creative minds, who prefer to express their views to Hindi speaking masses of India.

             

 
 

मुखपृष्ठ  |  कहानी कविता | कार्टून कार्यशाला कैशोर्य चित्र-लेख |  दृष्टिकोण नृत्य निबन्ध देस-परदेस परिवार | बच्चों की दुनिया भक्ति-काल धर्म रसोई लेखक व्यक्तित्व व्यंग्य विविधा |  विश्व साहित्य | संस्मरण | सृजन साहित्य कोष |
प्रतिक्रिया पढ़ें! |                         प्रतिक्रिया लिखें!

HomeBoloji | Kabir | Writers | Contribute | Search | Fonts | FeedbackContact

(c) HindiNest.com 1999-2012 All Rights Reserved. A Boloji.com Website
Privacy Policy | Disclaimer
Contact : manisha@hindinest.com